बैंड-बाजे के साथ उपाश्रय पहुंचा कल्पसूत्र, पर्युषण में 14 सितंबर तक बहेगी ज्ञान की गंगा
मुनि संवेगरत्न सागर ने बताए भगवान महावीर के भवों के आध्यात्मिक प्रसंग

रायपुर, 11 सितंबर 2026। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास के दौरान पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन 10 सितंबर को विशेष ज्ञान आराधना का आयोजन हुआ। धर्मसभा में मुनि संवेगरत्न सागर ने पवित्र कल्पसूत्र का वाचन प्रारंभ किया। इसका क्रम 14 सितंबर तक जारी रहेगा। वाचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं धर्मसभा में उपस्थित रहे।
बैंड-बाजे के साथ उपाश्रय पहुंचा कल्पसूत्र
पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन सुबह चतुर्विध संघ के सानिध्य में लाभार्थी परिवार के विवेकानंद नगर स्थित निवास से कल्पसूत्र को भक्तिमय वातावरण में बैंड-बाजे के साथ ज्ञानवल्लभ उपाश्रय लाया गया। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए।
उपाश्रय पहुंचने के बाद लाभार्थी परिवार ने विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मुनि संवेगरत्न सागर को कल्पसूत्र बोहराया। इसके पश्चात धर्मसभा में पांच ज्ञान की पूजा की गई।
एक दिन पहले मस्तक पर धारण कर घर ले गए थे ग्रंथ
कल्पसूत्र को उपाश्रय लाए जाने से एक दिन पहले लाभार्थी परिवार द्वारा पवित्र ग्रंथ को मस्तक पर धारण कर अपने निवास तक ले जाया गया था। वहां विधि-विधान के साथ ज्ञान की पूजा-अर्चना की गई।
अब 14 सितंबर तक धर्मसभा में मुनिभगवंत के मुखारविंद से कल्पसूत्र के श्रुत का वाचन होगा। इस दौरान श्रावक-श्राविकाओं को पवित्र ग्रंथ के आध्यात्मिक प्रसंगों और ज्ञानवर्धक शिक्षाओं को सुनने का अवसर मिलेगा।
‘कल्पसूत्र महामंगलकारी, श्रवण से विघ्नों का नाश’
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि कल्पसूत्र महामंगलकारी ग्रंथ है और इसके श्रवण से अनेक विघ्नों का नाश होता है। उन्होंने बताया कि कल्पसूत्र में चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के भवकालों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
मुनिश्री ने कहा कि पूर्व समय में कल्पसूत्र का वाचन और श्रवण साधु-साध्वी मंडल तक सीमित था, लेकिन वर्तमान समय में गृहस्थ श्रावकों के बीच भी इसका वाचन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ का श्रवण जीवों के दुख, पाप और संताप के क्षय का माध्यम बनता है और आत्मा को मोक्ष मार्ग की दिशा प्रदान करता है।
मुनिश्री ने पर्युषण महापर्व के दौरान सभी श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक धर्मआराधना, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना करने का आह्वान किया।



