‘कांतारा’ की गूंज के बाद अब ‘जय हनुमान’ से ऋषभ शेट्टी दिखाएंगे आस्था और संस्कृति का महाकाव्य

मुंबई, 28 फरवरी 2026। भारतीय सिनेमा में लोककथाओं और आस्था को केंद्र में रखकर अलग पहचान बनाने वाले ऋषभ शेट्टी एक बार फिर चर्चा में हैं। कांतारा और इसके प्रीक्वल कांतारा चैप्टर 1 की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब वह अपनी नई फिल्म जय हनुमान के जरिए भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक शक्ति को बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी में हैं।
‘कांतारा’ ने बदली सिनेमा की दिशा
‘कांतारा’ फ्रेंचाइजी ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 1300 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। लेकिन इसकी असली सफलता केवल कमाई में नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक प्रभाव में है जिसने तटीय कर्नाटक की पवित्र परंपराओं और दैवीय लोककथाओं को वैश्विक पहचान दिलाई।
ऋषभ शेट्टी ने लेखक, अभिनेता और निर्देशक के रूप में एक ऐसी कहानी रची, जिसमें आध्यात्मिक ऊर्जा केवल दृश्य प्रभाव नहीं, बल्कि कथा की आत्मा बनकर उभरी। फिल्म ने स्थानीय परंपराओं को बिना किसी समझौते के दुनिया के सामने पेश किया, जिससे हर भाषा और क्षेत्र के दर्शक उससे जुड़ सके।
अब पौराणिक भव्यता के साथ ‘जय हनुमान’
अब ‘जय हनुमान’ के जरिए शेट्टी भारतीय पौराणिक कथाओं की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। अगर ‘कांतारा’ ने लोक आस्था का जश्न मनाया था, तो ‘जय हनुमान’ भक्ति, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत को बड़े पैमाने पर प्रस्तुत करने का वादा करती है।
दर्शकों की उत्सुकता सिर्फ फिल्म के भव्य स्केल को लेकर नहीं, बल्कि इस बात को लेकर भी है कि ऋषभ शेट्टी आस्था, कहानी और सिनेमाई अनुभव को किस तरह एक सूत्र में पिरोएंगे।
भारतीय जड़ों से वैश्विक पहचान तक
ऋषभ शेट्टी ने यह साबित किया है कि अपनी मिट्टी और परंपराओं से जुड़ी कहानियां भी वैश्विक स्तर पर गूंज सकती हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि मौलिकता और सांस्कृतिक सच्चाई ही किसी कहानी को कालजयी बनाती है।
अब ‘जय हनुमान’ के साथ उम्मीद है कि वह भारतीय आध्यात्मिकता की उसी ऊर्जा को एक नए आयाम में दुनिया के सामने रखेंगे।



