प्रधानमंत्री के नाम को मिट्टी में मिलाने में जुटा PMGSY विभाग : महेश गागड़ा

बीजापुर, 10 अप्रैल 2026। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत निर्माणाधीन सड़कों और पुलियाओं में कथित भ्रष्टाचार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों से लगातार मिल रही गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायतों के बाद यह मुद्दा गंभीर होता जा रहा है और पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। वहीं ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत पूर्व मंत्री महेश गागड़ा से की है।
गौरतलब है कि वर्ष 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की थी। योजना का उद्देश्य 500 से अधिक आबादी वाले गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ना था, ताकि ग्रामीण विकास को गति मिल सके और किसान अपनी उपज आसानी से बाजार तक पहुंचा सकें।
लेकिन बीजापुर जिले में इस योजना के तहत हो रहे कार्यों की स्थिति चिंताजनक नजर आ रही है। आरोप है कि पीएमजीएसवाय विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से सड़कों और पुलियाओं का निर्माण बेहद घटिया गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है। कई जगहों पर हालात ऐसे हैं कि पुलिया हाथ से उखड़ने की स्थिति में हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

मामले को लेकर ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री महेश गागड़ा और जिला प्रशासन से शिकायत की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गागड़ा ने कहा कि मीडिया में प्रकाशित खबरों और ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और संबंधित विभाग के मंत्री से चर्चा की गई है।
पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे कराए जाएंगे। जहां भी लापरवाही या अनियमितता पाई जाएगी, वहां दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी और जनता को टिकाऊ व बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
आनन-फानन में कार्रवाई शुरू, 3 पुलिया तोड़ी गई
मीडिया में खबरें सामने आने के बाद विभाग भी हरकत में आ गया है। आनन-फानन में कई जगहों पर घटिया तरीके से बनी पुलियाओं को तोड़ा गया है। विभागीय इंजीनियर राजेंद्र सिंह के अनुसार अब तक 3 पुलियाओं को ध्वस्त किया जा चुका है और संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
वहीं, जब पीएमजीएसवाय के एसडीओ जांगड़े से इस संबंध में संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन बंद मिला, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि इस गंभीर मामले में प्रशासन कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है या यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।



