छत्तीसगढ़

आईटीआर में दो बाघों का शिकार: शिकारी बेखौफ और सिस्टम बेबस…

बीजापुर, 3 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित इंद्रावती टाइगर रिजर्व (आईटीआर) से वन्यजीव संरक्षण को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, टाइगर रिजर्व के पासेवाड़ा कोर एरिया में दो बाघों के शिकार का मामला उजागर हुआ है। घटना के सामने आने के बाद वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं, बाघों की खाल भी बरामद हुई है। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों और सुरक्षा एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार पर इस पूरे मामले का खुलासा हुआ। हालांकि, वन विभाग की ओर से अब तक आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई है।

अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह पर संदेह

जानकारों का मानना है कि इस घटना के पीछे किसी अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह का हाथ हो सकता है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाहरी लोगों की गतिविधियां बढ़ने की सूचनाएं मिल रही थीं। ऐसे में संगठित शिकार गिरोह की भूमिका से इनकार नहीं किया जा रहा।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

टाइगर रिजर्व के कोर एरिया जैसे अत्यंत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में दो बाघों का शिकार होना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि क्या संबंधित अधिकारियों को पहले से किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी थी और यदि थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

संरक्षण प्रयासों को बड़ा झटका

इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश के महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में शामिल है। यहां बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में दो बाघों के शिकार की घटना को संरक्षण प्रयासों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं हुई तो भविष्य में भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है।

उठ रहे हैं कई सवाल

  • कोर एरिया तक शिकारी कैसे पहुंचे?
  • क्या निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक हुई?
  • क्या किसी अंतरराज्यीय शिकारी गिरोह की संलिप्तता है?
  • क्या वन विभाग को पहले से गतिविधियों की जानकारी थी?
  • बाघ संरक्षण पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपये के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

फिलहाल पूरे मामले को लेकर वन विभाग और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मामले में आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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