छत्तीसगढ़

सुधा ओपन स्कूल में बच्चों ने दिया संदेश : ‘अन्न की बर्बादी रोकें, भविष्य को सुरक्षित करें’

रायपुर, 30 सितंबर 2025। सुधा ओपन स्कूल में 29 सितंबर 2025 को अंतर्राष्ट्रीय खाद्य हानि और अपशिष्ट जागरूकता दिवस (International Day of Awareness of Food Loss and Wastage) बड़े उत्साह और सामाजिक संदेशों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती ईशा शुक्ला (रेवासी सैफायर ग्रीन) शामिल हुईं।

बच्चों ने निकाली रैली, थामे प्रेरक नारे
स्कूल के बच्चों ने हाथों में रंग-बिरंगे प्लेकार्ड्स लेकर जागरूकता रैली निकाली। सभी बच्चों ने विशेष सैश पहन रखे थे, जिन पर लिखा था— “खाद्य हानि और अपशिष्ट जागरूकता (सुधा सोसाइटी द्वारा)”।

बच्चों द्वारा थामे गए नारे समाज को सोचने पर मजबूर कर रहे थे:
“अन्न की बर्बादी रोकें, भविष्य को सुरक्षित करें”
“भोजन का सम्मान करें, बर्बादी न करें”
“आज का बचाव, कल का भविष्य”
ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी इस रैली की सराहना की और बच्चों के प्रयासों को भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश बताया।

मुख्य अतिथि का संबोधन
मुख्य अतिथि श्रीमती ईशा शुक्ला ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि खाद्य अपशिष्ट सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय संकट भी है। उन्होंने कहा: “भारत जैसे देश में जहां लाखों लोग भूखे सोते हैं, वहां भोजन की बर्बादी को रोकना हर नागरिक का कर्तव्य है। आज बच्चों ने जो संदेश दिया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।”

सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान
इस अवसर पर बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं और स्वागत गीत गाकर माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया। स्कूल के चेयरमैन जीके भटनागर ने कार्यक्रम का संचालन किया और मुख्य अतिथि को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम की सफलता में मिस भारती मरावी और मिस खुशी यादव का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर सुधा सोसाइटी की ओर से सभी बच्चों को जलपान कराया गया।

भारत में खाद्य अपशिष्ट की स्थिति: चिंताजनक आंकड़े
चेयरमैन जी.के. भटनागर ने यूएन फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट 2024 के हवाले से भारत में खाद्य अपशिष्ट पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल 68.7 से 78.2 मिलियन टन खाद्य अपशिष्ट उत्पन्न होता है। यह लगभग 35.5 मिलियन किलोग्राम प्रतिदिन है। प्रति व्यक्ति औसत अपशिष्ट 55 किलोग्राम प्रतिवर्ष है।

उन्होंने कहा कि इसके प्रमुख कारण हैं अधिक खरीदारी और खराब भोजन योजना, सीमित भंडारण सुविधाएं और जरूरत से ज्यादा भोजन पकाने की आदतें।

गंभीर प्रभाव
खाद्य असुरक्षा: लाखों लोग भूख से जूझते हैं जबकि टनों भोजन बर्बाद हो जाता है। पर्यावरणीय प्रभाव: खाद्य अपशिष्ट से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ता है, जो जलवायु परिवर्तन को तेज करता है। आर्थिक नुकसान: यह देश की अर्थव्यवस्था को भी गहरा आघात पहुँचाता है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य
भारत घरेलू खाद्य अपशिष्ट में दुनिया में दूसरे स्थान पर है। हालांकि इसकी प्रति व्यक्ति बर्बादी विकसित देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम है, लेकिन कुल संख्या बहुत अधिक होने से यह वैश्विक चिंता का विषय है।

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