छत्तीसगढ़

पत्नी अपनी मर्जी से पति से अलग रह रही है तो नहीं मिलेगी गुजारा भत्ता: हाईकोर्ट

बिलासपुर, 06 अक्टूबर 2025। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अगर पत्नी अपनी इच्छा से पति से अलग रह रही है और इसके पीछे कोई उचित कारण साबित नहीं कर पाती, तो वह गुजारा भत्ता की हकदार नहीं होगी।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने रायगढ़ निवासी एक महिला की याचिका को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। फैमिली कोर्ट ने पहले ही यह कहते हुए महिला की भरण-पोषण की मांग अस्वीकार कर दी थी कि वह अपनी मर्जी से पति से अलग रह रही है।

पति पर लगाए थे प्रताड़ना के आरोप
महिला ने याचिका में बताया था कि उसकी शादी 21 जून 2009 को हुई थी और 26 फरवरी 2011 को जुड़वां बेटे का जन्म हुआ। उसने आरोप लगाया कि पति और ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और बाद में मायके भेज दिया।

महिला ने दावा किया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर है, जबकि उसका पति भिलाई में कपड़ों का व्यवसाय करता है और करीब 70 हजार रुपये प्रति माह कमाता है। इसलिए उसने हर महीने 20 हजार रुपये गुजारा भत्ता की मांग की थी।

पति ने लगाया झूठे आरोपों का दावा
पति ने कोर्ट में कहा कि पत्नी बिना किसी वजह के अलग रह रही है और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी। फैमिली कोर्ट ने पति के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि पत्नी के पास अलग रहने का कोई वैध कारण नहीं है, इसलिए वह भरण-पोषण की पात्र नहीं है।

घरेलू हिंसा का मामला लंबित
महिला ने पहले पति और परिजनों के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया था, जिसमें जेएमएफसी कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। महिला ने इस आदेश को चुनौती दी है, और यह मामला वर्तमान में लंबित है।

हाई कोर्ट का अवलोकन
हाई कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता पत्नी स्वेच्छा से अलग रह रही है और ऐसा करने का कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सकी। कोर्ट ने कहा: “जब तक पत्नी यह साबित नहीं करती कि अलग रहने का कोई उचित कारण है, तब तक वह गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं हो सकती।”

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