संयुक्त परामर्शदात्री समिति की बैठक में चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों की 6 सूत्रीय मांगों पर सहमति

रायपुर, 23 दिसंबर 2025। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) के प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में 22 दिसंबर को इंद्रावती भवन स्थित सभागार में राज्य स्तरीय विभागाध्यक्ष–संयुक्त परामर्शदात्री समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रदेश अध्यक्ष, महामंत्री एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक से पूर्व प्रमुख अभियंता द्वारा पाँच सूत्रीय एजेंडा पर चर्चा के लिए पत्र जारी किया गया था। हालांकि, लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी संघ ने पाँच के स्थान पर छह सूत्रीय एजेंडा प्रस्तुत किया। संघ के प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व योगेश चौरे ने किया, जिसमें सफल मैत्री, संयोजक, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग भी शामिल रहे। सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का मुद्दा प्रमुख
बैठक में सर्वप्रथम लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में कार्यरत लगभग 2400 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का विषय उठाया गया। संघ ने बताया कि ये कर्मचारी वर्षों से विभाग के रिक्त पदों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। कार्यभारित एवं आकस्मिक निधि नियम 1974-75 (संशोधित 1984) के अनुसार तीन वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद नियमित वेतनमान तथा प्रारंभिक तीन वर्षों तक कलेक्टर दर से भुगतान का प्रावधान है।
इस विषय पर संघ के महामंत्री द्वारा ठोस तर्क रखे गए। प्रमुख अभियंता ने बताया कि विभाग में कार्यभारित भर्ती नियम अभी उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इन्हें तैयार करने की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है। संघ की मांग पर भर्ती नियम समिति में संघ के प्रतिनिधि को शामिल करने पर नियमों के अवलोकन के बाद लिखित सुझाव देने को कहा गया।
साथ ही, जिन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को विभिन्न योजनाओं में समायोजित कर प्लेसमेंट के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है, उन्हें मूल दैनिक वेतनभोगी मानने की मांग भी रखी गई। इस पर प्रमुख अभियंता ने परीक्षण कर शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया।
ईपीएफ, श्रम सम्मान राशि और नियमितीकरण
बैठक में ईपीएफ कटौती और श्रम सम्मान राशि पर भी चर्चा हुई। प्रमुख अभियंता ने बताया कि ईपीएफ को लेकर शासन से मार्गदर्शी निर्देश मांगे गए हैं और श्रम सम्मान राशि सुविधा अनुसार जारी की जाएगी।
संघ ने कार्यभारित कर्मचारियों के नियमित स्थापना में संविलियन का मुद्दा भी उठाया। शासन आदेश दिनांक 25 अक्टूबर 2002 के तहत अन्य विभागों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि PHED में लंबित है। इस पर प्रमुख अभियंता ने सहमति व्यक्त की।
समयमान वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रकरण
संघ की पहल पर दुर्ग सर्कल में समयमान वेतन के आदेश जारी हो चुके हैं। वहीं बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर जोन में शेष कर्मचारियों को प्रथम एवं तृतीय समयमान वेतन दिए जाने की मांग रखी गई, जिस पर शीघ्र आदेश जारी करने का आश्वासन दिया गया।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन, ग्रेच्युटी सहित अन्य लाभों में हो रही देरी पर भी चर्चा हुई। प्रमुख अभियंता ने स्वीकार किया कि लेखा एवं कोष कार्यालय की आपत्तियों के निराकरण में विभागीय स्तर पर देरी होती है। इसके लिए कड़े निर्देश जारी करने की बात कही गई।
बैठक में संघ की सभी छह सूत्रीय मांगों पर प्रमुख अभियंता के साथ सहमति बनी और शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई गई।
मंत्रालय स्तर पर भी हुई चर्चा
बैठक के बाद योगेश चौरे के नेतृत्व में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में अवर सचिव, अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास विभाग से लगभग एक घंटे तक चर्चा की। चर्चा का विषय 13 अक्टूबर 2025 को विधि विभाग को दिए गए ज्ञापन से जुड़ा प्रकरण था, जो आदिवासी विकास विभाग के सचिव स्तर पर लंबित है।
यह मामला रतन कश्यप एवं अन्य प्रकरण (2023) में उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद आदेश दिनांक 4 नवंबर 2016 की गलत व्याख्या से जुड़ा है, जिसके कारण बस्तर संभाग सहित राज्य के कई जिलों में हजारों कर्मचारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी गई थी।
मंत्रालय स्तर पर बताया गया कि इस प्रकरण का परीक्षण लगभग पूर्ण हो चुका है और शीघ्र आदेश जारी किए जाएंगे। रतन कश्यप वार्षिक वेतन वृद्धि प्रकरण अब अंतिम चरण में पहुंच गया है और संघ की पहल पर ठोस कार्रवाई शुरू हो चुकी है।



