छत्तीसगढ़

बालगृह कर्मचारियों की प्रशासन से गुहार, सेवाएं यथावत रखने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कोंडागांव, 19 जनवरी 2026। महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत एनजीओ द्वारा संचालित बालगृह में कार्यरत कर्मचारियों ने सोमवार को अपनी सेवाएं यथावत बनाए रखने की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने प्रशासन से अपील की कि वर्षों की सेवा, अनुभव और समर्पण को देखते हुए उनकी नौकरी समाप्त न की जाए।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि वे लंबे समय से अनाथ, निराश्रित एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की देखभाल में जुटे हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से कोरोना महामारी काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन दौर में, जब लोग अपने घरों में सुरक्षित रहना चाहते थे, तब बालगृह के कर्मचारी अपने परिवारों से दूर रहकर बच्चों के साथ परिसर में ही रहे।

कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना काल में उन्होंने महीनों तक बालगृह नहीं छोड़ा और बच्चों की सुरक्षा, भोजन, इलाज, शिक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी निभाई। जान जोखिम में डालकर भी उन्होंने बच्चों को अकेला नहीं छोड़ा और हर परिस्थिति में उनका संबल बने रहे।

कर्मचारियों ने बताया कि उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि बालिकागृह कोंडागांव की बालिकाएं आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हैं। इसके साथ ही बालिकागृह की बालिकाएं लगातार दो वर्षों से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं, जो पूरे जिले के लिए गौरव की बात है।

कर्मचारियों ने आशंका जताई कि यदि उनकी सेवाएं समाप्त की गईं तो उनके परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। साथ ही, इसका सीधा असर बालगृह में रह रहे बच्चों की देखभाल और व्यवस्थाओं पर पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान कर्मचारी पूरी तरह प्रशिक्षित और अनुभवी हैं।

ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने कलेक्टर से मांग की कि एनजीओ द्वारा संचालित बालगृह में कार्यरत सभी कर्मचारियों को यथावत सेवा में रखा जाए, ताकि बच्चों की देखरेख और संरक्षण की व्यवस्था बाधित न हो।

इस दौरान बड़ी संख्या में बालगृह कर्मचारी उपस्थित रहे और उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

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