छत्तीसगढ़

हरकी पैड़ी समेत कई घाटों पर गैर हिंदुओं का प्रवेश निषिद्ध, रील्स पर भी बैन

हरिद्वार, 26 जनवरी 2026। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा तटों की पवित्रता और तीर्थ की मर्यादा बनाए रखने के उद्देश्य से हरकी पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर निषेध लागू कर दिया गया है। इस संबंध में श्रीगंगा सभा की ओर से विभिन्न स्थानों पर सूचना बोर्ड और बैनर लगाए गए हैं, जिनमें नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

वीडियो या रील्स बनाने पर भी प्रतिबंध
श्रीगंगा सभा ने यह निर्णय ब्रिटिश शासनकाल में लागू म्यूनिसपल एक्ट के प्रावधानों के तहत लिया है। हरकी पैड़ी, मालवीय द्वीप और अन्य प्रमुख घाटों पर लगाए गए बोर्डों में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि तीर्थ क्षेत्र में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा। इसके साथ ही घाटों पर फिल्मी गीतों पर वीडियो या रील्स बनाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। सभा का कहना है कि यदि इस प्रकार की सामग्री किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होती पाई गई, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शुक्रवार को घाटों पर लगे इन बैनरों को लेकर शहर में चर्चा का माहौल रहा। व्यापारी वर्ग से लेकर आम श्रद्धालुओं तक ने इसे सनातन परंपराओं की रक्षा की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। हालांकि, पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि बीते समय में घाटों की मर्यादा से जुड़े कुछ घटनाक्रम सामने आए हैं, जिसके बाद सजग रहने की आवश्यकता महसूस की गई। उन्होंने कहा कि सभी को यह समझना होगा कि तीर्थ की गरिमा क्या है और यहां आने से पहले किन नियमों का पालन करना आवश्यक है। सनातन धर्म और परंपराओं के संरक्षण की दिशा में यह कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि श्रीगंगा सभा का गठन वर्ष 1916 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने तीर्थ पुरोहितों और महंतों के साथ मिलकर किया था। इसका उद्देश्य गंगा की अविरल धारा और पवित्र स्वरूप की रक्षा करना था। अंग्रेजी शासनकाल में भी हरिद्वार को अत्यंत पवित्र क्षेत्र माना गया था और म्यूनिसपल एक्ट के तहत यहां मांस और मदिरा के सेवन व बिक्री पर तीन किलोमीटर के दायरे में प्रतिबंध लगाया गया था।

श्रीगंगा सभा का कहना है कि यह पहल हरिद्वार की धार्मिक अस्मिता, सांस्कृतिक विरासत और तीर्थ की मर्यादा को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है।

Related Articles

Back to top button