छत्तीसगढ़

निंदा प्रस्ताव पर सियासत तेज: अकबर बोले-‘यह सिर्फ राजनीतिक संदेश, कानूनी असर नहीं’

रायपुर, 27 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित विशेष विधानसभा सत्र और निंदा प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। राज्य के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने निंदा प्रस्ताव को पूरी तरह प्रतीकात्मक बताते हुए कहा कि इसका किसी कानून पर कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं होता।

अकबर ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित न हो पाने के बाद लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पहले ही 2023 में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के रूप में लागू हो चुका है, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

विशेष सत्र पर दी संवैधानिक जानकारी

पूर्व मंत्री ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत राज्यपाल को विधानसभा सत्र बुलाने का अधिकार है, लेकिन व्यवहार में यह निर्णय मंत्रिपरिषद की सलाह पर लिया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी महत्वपूर्ण या राजनीतिक मुद्दे पर विशेष सत्र बुला सकती है।

‘पहली बार निंदा प्रस्ताव के लिए विशेष सत्र’

अकबर ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार निंदा प्रस्ताव के लिए अलग से विशेष सत्र बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसे प्रस्ताव नियमित सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा सरकार की नीतियों की आलोचना के लिए लाए जाते हैं।

भाजपा पर लगाए आरोप

अकबर ने यह भी कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे की आड़ में विपक्षी दलों पर गलत आरोप लगा रही है। उनके अनुसार, परिसीमन को लेकर उठे विवाद के बाद अब विपक्ष को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने दोहराया कि निंदा प्रस्ताव का उद्देश्य केवल राजनीतिक संदेश देना होता है, न कि किसी कानून या नीति पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालना।

फिलहाल इस पूरे मुद्दे पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस पर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।

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