नकटी बुलडोजर कार्रवाई पर कांग्रेस हमलावर, बीजेपी बैकफुट पर…

रायपुर, 1 जुलाई 2026। राजधानी रायपुर के माना एयरपोर्ट के समीप स्थित नकटी गांव में विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए 77 मकानों पर चली बुलडोजर कार्रवाई अब राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बन गई है। दो दिनों से जारी इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमलावर है, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर भी कार्रवाई की टाइमिंग और तरीके को लेकर असहजता देखी जा रही है।
प्रशासन ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए नकटी गांव के 77 मकानों को ध्वस्त कर दिया। इनमें कच्चे मकानों के साथ कई पक्के मकान और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने आवास भी शामिल थे। हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को नवा रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में पुनर्वास की व्यवस्था की गई है।
पुनर्वास पर भी उठे सवाल
बुलडोजर कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों को सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में भेजा जा रहा है, लेकिन वहां मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर लोगों में नाराजगी है। कई आवासों में पेयजल, बिजली और शौचालय जैसी सुविधाएं अधूरी बताई जा रही हैं। विस्थापित परिवारों का कहना है कि बिना पूरी व्यवस्था के उन्हें स्थानांतरित किया जा रहा है।
2022 में बनी थी विधायक कॉलोनी की योजना
जानकारी के अनुसार, नकटी गांव की भूमि पर विधायक कॉलोनी बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान तैयार हुआ था। वर्ष 2023 में अतिक्रमण हटाने की योजना बनी, लेकिन कानूनी अड़चनों के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। दिसंबर 2023 में नई सरकार बनने के बाद इस परियोजना को फिर गति मिली और इस बार प्रशासन ने व्यापक तैयारी के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया।
बताया जा रहा है कि छुट्टी के दिनों में नोटिस चस्पा किए गए और सोमवार तड़के भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी गई। विरोध के बावजूद शाम तक पूरी बस्ती को खाली करा दिया गया।
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने उठाए सवाल
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके मंत्री रहते भी नकटी गांव की बस्ती हटाने का प्रस्ताव आया था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गरीबों को उजाड़ने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर क्षेत्र में विधायक कॉलोनी के लिए कई अन्य स्थान उपलब्ध हैं और गरीबों के घर तोड़ना उचित नहीं है।
कांग्रेस का विरोध, भाजपा में भी असहजता
बुलडोजर कार्रवाई के बाद कांग्रेस लगातार सरकार को घेर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौके पर पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मिले और सरकार की कार्रवाई को अमानवीय बताया।
वहीं भाजपा की ओर से इस मुद्दे पर अधिकतर नेता चुप्पी साधे हुए हैं। स्थानीय विधायक अनुज शर्मा ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया है, जबकि सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पहले कहा था कि उचित पुनर्वास के बिना किसी का घर नहीं तोड़ा जाएगा। हालांकि अगले ही दिन कार्रवाई शुरू होने से इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बारिश के बीच कार्रवाई पर बढ़ा विवाद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन बरसात के मौसम में गरीब परिवारों के मकान तोड़े जाने और विधायक कॉलोनी के लिए कार्रवाई किए जाने से सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। कार्रवाई की टाइमिंग और पुनर्वास व्यवस्था को लेकर अब राजनीतिक बहस और तेज होती नजर आ रही है।


