2040 तक वाराणसी की एक-तिहाई जल जरूरत पूरी करेगा ट्रीटेड वॉटर

वाराणसी, 14 जुलाई 2026। वाराणसी में जल प्रबंधन को अधिक टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), वाराणसी नगर निगम (VNN) और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (CEEW) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ‘सिटी लेवल एक्शन प्लान फॉर रियूज ऑफ ट्रीटेड वॉटर फॉर वाराणसी’ के अनुसार, शहर वर्तमान में उपलब्ध उपचारित (ट्रीटेड) प्रयुक्त जल का लगभग 30 प्रतिशत तक पुनरुपयोग करने की क्षमता रखता है। यदि इस योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो वर्ष 2040 तक ट्रीटेड यूज्ड वॉटर शहर की कुल गैर-पेयजल जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत, यानी एक-तिहाई से अधिक हिस्सा पूरा कर सकता है।
इस रिपोर्ट का विमोचन सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ऑल इंडिया वॉटर रिसोर्स सेक्रेटरीज कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने किया। रिपोर्ट में वाराणसी के लिए उपचारित जल के पुनरुपयोग के 12 प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनके माध्यम से प्रतिदिन 91 से 127 मिलियन लीटर (एमएलडी) ट्रीटेड यूज्ड वॉटर का दोबारा उपयोग संभव हो सकेगा।
वाराणसी में सीवेज ट्रीटमेंट की वर्तमान स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में प्रतिदिन लगभग 465 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। शहर की स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 422 एमएलडी है, लेकिन वर्तमान में वास्तविक रूप से 354 एमएलडी, यानी लगभग 76 प्रतिशत सीवेज का ही उपचार हो पा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसका प्रमुख कारण यह है कि शहर के केवल 38 प्रतिशत घर ही केंद्रीयकृत सीवरेज नेटवर्क से जुड़े हैं। शेष क्षेत्रों का अपशिष्ट जल 43 चिन्हित नालों के माध्यम से वरुणा नदी और अंततः गंगा में पहुंच जाता है। ऐसे में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं।
‘यूज-ट्रीट-डिस्चार्ज’ से ‘ट्रीट-रियूज’ मॉडल की ओर
रिपोर्ट में वाराणसी के लिए पारंपरिक “यूज-ट्रीट-डिस्चार्ज” मॉडल से आगे बढ़कर “ट्रीट-रियूज” यानी उपचारित जल के पुनरुपयोग पर आधारित सर्कुलर वॉटर मैनेजमेंट मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है।
इसके तहत प्रमुख सुझाव दिए गए हैं—
- शहर में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार।
- मौजूदा एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की क्षमता का बेहतर उपयोग।
- जरूरत के अनुसार टर्शियरी ट्रीटमेंट तकनीक विकसित करना।
- ट्रीटेड वॉटर के लिए समर्पित पुनरुपयोग क्षेत्र (Dedicated Reuse Zones) विकसित करना।
- उपचारित जल की गुणवत्ता को विभिन्न उपयोगों के अनुरूप तैयार करना।
इन क्षेत्रों में होगा उपचारित जल का उपयोग
रिपोर्ट में ट्रीटेड यूज्ड वॉटर के उपयोग के लिए कई बड़े सेक्टर चिन्हित किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- कृषि
- रेलवे
- बनारस लोकोमोटिव वर्क्स
- निर्माण कार्य
- औद्योगिक इकाइयां
- पार्क एवं हरित क्षेत्र
- सार्वजनिक उपयोगिताएं
- आईआईटी-बीएचयू परिसर
- जलाशयों और जल निकायों का पुनर्जीवन
इन क्षेत्रों में उपचारित जल के उपयोग से ताजे जल पर निर्भरता कम होगी और भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक रूप से भी लाभकारी मॉडल
रिपोर्ट में वित्तीय व्यवहार्यता का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार यदि उद्योगों, निर्माण कंपनियों और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को टर्शियरी-ट्रीटेड यूज्ड वॉटर वर्तमान भूजल दोहन लागत के बराबर मूल्य पर उपलब्ध कराया जाए, तो इससे सीवेज ट्रीटमेंट प्रणाली को उन्नत बनाने के लिए आवश्यक संचालन एवं रखरखाव (O&M) लागत का 77 से 93 प्रतिशत हिस्सा राजस्व के रूप में प्राप्त किया जा सकता है।
इससे वाराणसी नगर निगम की सरकारी अनुदान पर निर्भरता घटेगी और उपचारित जल के लिए एक स्थायी बाजार विकसित होगा।
जल शक्ति मंत्री ने बताया भविष्य की दिशा
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि वॉटर विजन-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को जल संसाधनों के उपयोग की चक्रीय (Circular Economy) प्रणाली अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि वाराणसी की यह योजना इस दिशा में एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करती है, जो शहरी विकास, जल संरक्षण और गंगा जैसी पवित्र नदियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सीईईडब्ल्यू ने बताया आगे का रास्ता
सीईईडब्ल्यू के फेलो डॉ. नितिन बस्सी ने कहा कि वाराणसी में उपचारित जल के लिए पहले से मजबूत आधारभूत ढांचा मौजूद है। अब जरूरत है कि सीवरेज संग्रह प्रणाली को मजबूत किया जाए, ट्रीटेड वॉटर की गुणवत्ता को उपयोग के अनुरूप बेहतर बनाया जाए और इसे वास्तविक मांग वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित पुनरुपयोग से न केवल ताजे पानी की बचत होगी, बल्कि स्थानीय जल स्रोतों की गुणवत्ता भी सुधरेगी और शहरी जल प्रबंधन अधिक टिकाऊ बनेगा।
देशभर के लिए बन सकता है मॉडल
सीईईडब्ल्यू के पूर्व अध्ययन के अनुसार, भारत में ट्रीटेड यूज्ड वॉटर का पुनरुपयोग वर्ष 2047 तक लगभग 3.04 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। इससे प्रतिवर्ष 72,597 करोड़ रुपये का संभावित राजस्व, 1.6 से 2.3 लाख करोड़ रुपये का आधारभूत ढांचा निवेश और एक लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाराणसी की यह कार्ययोजना देश के अन्य नदी तटीय शहरों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकती है, जहां उपचारित जल का उपयोग जल संरक्षण, आर्थिक विकास और नदी पुनर्जीवन के लिए किया जा सकता है।



