फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव पर सदन में हंगामा, जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस का वॉकआउट
भूपेश बोले- सरपंच-सचिव को बचा रही सरकार

रायपुर, 16 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में उद्योग स्थापना के लिए कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव का मामला गुरुवार को जोरदार तरीके से उठा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर सरपंच, सचिव और उद्योगपतियों को बचाने का आरोप लगाया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
भूपेश ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने ग्राम अल्दा और ग्राम देवरी-घुलघुल में उद्योग स्थापना के लिए कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जांच रिपोर्ट आने के एक साल बाद भी पुलिस ने केवल अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की।
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के दस्तावेज सचिव के पास रहते हैं और सरपंच की देखरेख में काम होता है, फिर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज करने का क्या औचित्य है। उन्होंने उद्योग कंपनियों की भूमिका की जांच और जमीन आवंटन निरस्त करने की भी मांग की।
मंत्री ओपी चौधरी का जवाब
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर 22 जून 2026 को तिल्दा-नेवरा थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
उन्होंने बताया कि जांच में ग्रामसभा रजिस्टर में पहले उद्योग के पक्ष में प्रस्ताव नहीं होने का उल्लेख था, लेकिन बाद में अंतिम दो पंक्तियां जोड़कर प्रस्ताव पारित दिखाया गया। मंत्री ने कहा कि पुलिस विवेचना कर रही है और दोषी पाए जाने पर सरपंच-सचिव सहित संबंधित लोगों पर कार्रवाई होगी।
पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिली
मंत्री ने सदन को बताया कि संबंधित कंपनियों ने अभी तक छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की है और न ही पर्यावरणीय स्वीकृति जारी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैध ग्रामसभा प्रस्ताव के बिना आगे की प्रक्रिया संभव नहीं है।
कांग्रेस का वॉकआउट
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट भूपेश बघेल ने सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और पूछा कि क्या सरकार विवादित जमीन आवंटन निरस्त करेगी। स्पष्ट जवाब नहीं मिलने पर कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और विधानसभा परिसर में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।



