संभवनाथ जिनालय के प्रथम पाषाण स्थापना महोत्सव में जुटे श्रद्धालु
टेगौर नगर से विवेकानंद नगर तक निकला भव्य बरगोड़ा

“विवेकानंद नगर में नूतन संभवनाथ जिनालय के प्रथम पाषाण स्थापना महोत्सव में श्रद्धालुओं ने भव्य बरगोड़े और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भक्तिभाव का उत्सव मनाया…”
रायपुर, 17 अगस्त 2026। विवेकानंद नगर स्थित ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के निर्माणाधीन नूतन जिनालय में 15 अगस्त को देवाधिदेव संभवनाथ भगवान के मंदिर की प्रथम पाषाण स्थापना का महामहोत्सव भक्तिभाव और धार्मिक उल्लास के साथ आयोजित किया गया। चतुर्विध संघ की पावन निश्रा में पार्श्व पद्मावती जिनालय, टेगौर नगर से विवेकानंद नगर स्थित नूतन जिनालय तक भव्य बरगोड़ा निकाला गया। इसमें पाषाण स्थापना के लाभार्थी परिवारों के साथ बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने हिस्सा लिया।
महोत्सव का आयोजन खरतरगच्छाधिपति जिनमणिप्रभसूरीश्वर के आज्ञा प्रदाता तथा खरतरगच्छाचार्य जिनपीयूषसागर की पावन प्रेरणा से किया गया। आयोजन में मुनि संवेगरत्न सागर आदि ठाणा 5 एवं साध्वी मंजूलाश्रीजी आदि ठाणा 4 का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
भक्ति गीतों से भक्तिरस में डूबा आयोजन
महोत्सव की शुरुआत 14 अगस्त से प्रभु भक्ति के साथ हुई। संध्या कार्यक्रम में संगीतकार राहुल झाबक ने भक्तिमय प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। मुख्य आयोजन 15 अगस्त की सुबह 7.30 बजे नूतन जिनालय परिसर में प्रारंभ हुआ।
इस दौरान रत्न एवं स्वर्ण पाषाण स्थापना की धार्मिक विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुई। मुनि संवेगरत्न सागर के सान्निध्य में विधिकारक अरविंदज चौरड़िया, इंदौर ने पाषाण स्थापना की धार्मिक विधियां संपन्न कराईं।
बरगोड़े में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
टेगौर नगर से निकले भव्य बरगोड़े में श्रद्धालु भक्ति और उत्साह के साथ शामिल हुए। धार्मिक ध्वजों और जयकारों के बीच बरगोड़ा नूतन जिनालय परिसर पहुंचा। यहां धार्मिक विधियों के साथ पाषाण स्थापना का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
इस दौरान पूरा जिनालय परिसर प्रभु भक्ति और जयकारों से गूंजता रहा। महोत्सव के समापन के बाद रत्नप्रभसूरी भवन के प्रथम तल पर साधर्मिक वात्सल्य का आयोजन किया गया, जिसमें समाजजनों ने सहभागिता की।



