छत्तीसगढ़

शुभ भाव मेहमान, अशुभ भाव चोर के समान : मुनि संवेगरत्न सागर

रायपुर, 19 अगस्त 2026। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास के दौरान मंगलवार को भगवान नेमिनाथ के दीक्षा कल्याणक दिवस पर विशेष प्रवचनमाला हुई। मुनि संवेगरत्न सागर ने भगवान नेमिनाथ के जीवन प्रसंगों के माध्यम से जीवदया, अहिंसा, करुणा और आत्मचिंतन का संदेश दिया।

मुनिश्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीव हिंसा से सावधान रहना चाहिए। नासमझी में किया गया हिंसा का कर्म भी व्यक्ति को उसके परिणाम भुगतने के लिए बाध्य करता है। जीवदया का भाव जागृत होने से दुख, दुर्गति और पीड़ा से बचने का मार्ग प्रशस्त होता है।

उन्होंने कहा कि भगवान नेमिनाथ ने अपने जीवन के माध्यम से प्रत्येक जीव के प्रति संवेदना और करुणा रखने की प्रेरणा दी। किसी भी प्राणी को कष्ट न पहुंचाना और सभी जीवों के प्रति दया का भाव रखना उनके जीवन का महत्वपूर्ण संदेश है।

अशुभ भावों से सजग रहने की जरूरत

मुनिश्री ने कहा कि शुभ भाव मेहमान के समान होते हैं, जो बुलाने पर आते हैं, जबकि अशुभ भाव चोर के समान होते हैं, जो बिना बताए आ जाते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपने मन, विचार और भावों पर निरंतर निगरानी रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि विवेक जागृत नहीं होगा और व्यक्ति नकारात्मक एवं कुंठित मानसिकता के साथ आगे बढ़ता रहेगा तो दुखों की परंपरा चलती रहेगी। जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता ही व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करती है।

बाहरी परिस्थितियों से पहले भीतर बदलाव जरूरी

मुनिश्री ने कहा कि जीवन में सुख-दुख आते-जाते रहते हैं। विवेक जागृत होने पर व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रख सकता है और उचित निर्णय ले सकता है। इसके विपरीत विवेक के अभाव में व्यक्ति नकारात्मक सोच और मानसिक उलझनों में फंसता चला जाता है।

उन्होंने कहा कि बाहरी परिस्थितियों को बदलने से पहले मनुष्य को अपने भीतर परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। विचारों की शुद्धता, आत्मचिंतन और सही-गलत का विवेक जीवन को सकारात्मक दिशा देते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर विवेक जागृत करने का प्रयास करना चाहिए, तभी शांति और सुख का मार्ग प्रशस्त होगा।

धर्मसभा में श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान नेमिनाथ के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। मुनिश्री ने कहा कि जीवदया केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि मानवता का मूल आधार है। प्रत्येक जीव के प्रति करुणा और संवेदना रखने से समाज में शांति और सद्भाव का वातावरण निर्मित किया जा सकता है।

20 अगस्त को पार्श्वनाथ परमात्मा का मोक्ष निर्वाण कल्याण महोत्सव

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि 20 अगस्त को पार्श्वनाथ परमात्मा का मोक्ष निर्वाण कल्याण महोत्सव भक्ति भाव से मनाया जाएगा। संभवनाथ जिनालय में पार्श्वनाथ परमात्मा का अभिषेक एवं पूजन होगा तथा परमात्मा को निर्वाण लाडू अर्पित किया जाएगा। यह अनुष्ठान मुनि संवेगरत्न सागर के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा।

उन्होंने बताया कि 18 अगस्त से 49 दिवसीय पंच परमेष्ठी श्रेणी तप की चौथी श्रेणी प्रारंभ हो चुकी है। इसके साथ गिरनार नेमी तप की श्रृंखला भी जारी है। धर्मसभा में 16 वर्षीय तपस्वी परी रामपुरिया के 9 उपवास पूर्ण होने पर चातुर्मास समिति द्वारा उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तप की अनुमोदना की।

Related Articles

Back to top button