छत्तीसगढ़

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में शिकारियों पर शिकंजा, 6 गिरफ्तार

वन्यजीव का मांस और शिकार सामग्री बरामद

रायपुर, 21 अगस्त 2026। इंद्रावती टाइगर रिजर्व, बीजापुर में वन्यजीव शिकार के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर नीतिकाकलेर क्षेत्र में दबिश देकर वन्यजीव का मांस और शिकार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई है।

मुखबिर की सूचना पर नीतिकाकलेर में दबिश

जानकारी के अनुसार, परिक्षेत्र पासेवाड़ा के अंतर्गत ग्राम नीतिकाकलेर क्षेत्र में वन्यजीव के शिकार की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने 19 अगस्त को कार्रवाई करते हुए मौके से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

तलाशी के दौरान वन्यजीव का मांस बरामद हुआ, जिसे प्रारंभिक तौर पर नीलगाय का मांस होने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा शिकार में उपयोग की जाने वाली अन्य सामग्री भी जब्त की गई।

सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया

वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश पर सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। मामले में बरामद मांस और अन्य सामग्री की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बारिश के बीच भी जारी है गश्त

वन विभाग के मुताबिक मानसून के दौरान लगातार बारिश, नदी-नालों में बढ़ते जलस्तर और दुर्गम रास्तों के बावजूद इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मैदानी कर्मचारी संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मजबूत सूचना तंत्र और सतत निगरानी के कारण शिकार के खिलाफ यह कार्रवाई संभव हो सकी।

संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई निगरानी

वन अपराध और अवैध शिकार पर नियंत्रण के लिए टाइगर रिजर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और सूचना तंत्र को और मजबूत किया जा रहा है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अवैध शिकार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

ग्रामीणों से सहयोग की अपील

वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से अपील की है कि अवैध शिकार या वन्यजीवों से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल निकटतम वन विभाग कार्यालय को दें। विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

इस कार्रवाई में इंद्रावती टाइगर रिजर्व के अधीक्षक, फरसेगढ़/पासेवाड़ा, सेण्ड्रा, कुटरू बफर, कुटरू कोर और मद्देड़ बफर के परिक्षेत्र अधिकारियों समेत मैदानी अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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