छत्तीसगढ़

दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में त्रिसंयोग धर्मलाभ, महामस्तकाभिषेक के साथ मंगल देशना

“आत्मा ही वास्तविक धन है, संसार में कोई गरीब नहीं” : मुनि आगम सागर

रायपुर, 24 अगस्त 2026। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में 23 अगस्त को मुनि आगम सागर, मुनि पुनीत सागर, एलक धैर्य सागर एवं एलक स्वागत सागर के मंगल सानिध्य में त्रिसंयोग धर्मलाभ, महामस्तकाभिषेक, धार्मिक कक्षाओं और मंगल देशना का भव्य आयोजन हुआ। सुबह 7:30 बजे शुरू हुए धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक

प्रातःकाल भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा का स्वर्ण कलशों से प्रथम महामस्तकाभिषेक किया गया। इसका पुण्य लाभ संजय दीप्ति जैन, अरुण जैन प्रदर्शनी नगर, प्रदीप जैन विश्वपरिवार, पवन कुमार, अमित कुमार, प्रणीत कुमार एवं श्रेय जैन जोरापारा वालों को प्राप्त हुआ।

इसके बाद मुनि आगम सागर के मंत्रोच्चार के बीच स्फटिक मणि की प्रतिमाओं पर शांतिधारा संपन्न हुई। शांतिधारा का पुण्य लाभ सुजीत कुमार जैन, लाभांडी और सुनील जैन, वारासिवनी वालों ने प्राप्त किया। त्रिकाल चौबीसी में प्रतिमा विराजमान कराने वाले गुरुकृपा परिवार, समता कॉलोनी के नरेंद्र जैन, योगेंद्र, रितेश और रिंकू जैन ने मूलनायक भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक किया।

बच्चों के लिए ‘थर्ड आई’ विशेष कक्षा

मुनि पुनीत सागर के सानिध्य में बच्चों के मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए प्रत्येक शनिवार और रविवार विशेष ‘थर्ड आई’ यानी अंतर ज्ञान चक्षु कक्षा आयोजित की जा रही है। शनिवार को दोपहर 4 बजे आयोजित कक्षा में 100 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। रविवार को भी दोपहर 1 बजे कक्षा आयोजित की जाएगी।

तत्त्वार्थ सूत्र और छह ढाला का अध्ययन

अभिषेक और शांतिधारा के बाद श्रद्धालुओं ने आचार्य की संगीतमय पूजन की। इसके पश्चात धार्मिक कक्षाओं में मुनि पुनीत सागर ने तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन कराया, जबकि मुनि आगम सागर ने छह ढाला ग्रंथ का वाचन कर जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों को समझाया।

आत्मा ही वास्तविक धन

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि आगम सागर ने कहा कि संसार में कोई भी व्यक्ति वास्तव में गरीब नहीं है, क्योंकि प्रत्येक जीव के पास अपनी अमूल्य और शाश्वत आत्मा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अज्ञान और विपरीत मान्यताओं के कारण भौतिक वस्तुओं को अपना समझकर संसार के दुखों में उलझा रहता है।

मुनिश्री ने कहा कि मकान, धन-दौलत और सांसारिक संबंध स्थायी नहीं हैं। यदि ये वास्तव में हमारे होते तो मृत्यु के बाद इन्हें अपने साथ ले जाना संभव होता। उन्होंने श्रद्धालुओं को आत्मा को वास्तविक और शाश्वत तत्व मानते हुए मोह-माया से ऊपर उठकर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

मुनिश्री ने सांसारिक मोह के दुष्परिणामों को समझाने के लिए एक प्रसंग भी सुनाया और बताया कि जीव अपने पूर्व कर्मों के प्रभाव से विभिन्न संबंधों में बंधता है। उन्होंने कहा कि मोह के साथ जीवन का अंत व्यक्ति को संसार चक्र में भटकाता है, जबकि मोह का त्याग और आत्मकल्याण की साधना ऊर्ध्वगति का मार्ग प्रशस्त करती है।

नवधा भक्ति से कराया मुनि संघ को आहार

पूजा और प्रवचन के बाद श्रद्धालुओं ने नवधा भक्ति के साथ मुनि संघ को आहार कराने का पुण्य लाभ लिया। मुनि आगम सागर को आहार कराने का सौभाग्य श्रीमती मोना अक्षत जैन सपरिवार, जगदलपुर वालों को मिला।

मुनि पुनीत सागर को आहार श्रीमती अंजली निलेश जैन, बुढ़ापारा ने कराया। एलक धैर्य सागर को आहार कराने का पुण्य लाभ दीपक, जिनेश कुमार, नवीन कुमार, राकेश, मुकेश, अनिमेश, निधि दीदी, मधु दीदी, राजकुमारी, प्रमोद कुमार एवं फूफाजी, आरोन वालों को प्राप्त हुआ। वहीं एलक स्वागत सागर का आज उपवास रहा।

आयोजन में रायपुर शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और मुनि संघ के दर्शन, प्रवचन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का धर्मलाभ लिया।

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