छत्तीसगढ़

अनुकूलता का राग छोड़कर वीतराग के मार्ग पर बढ़ो : मुनि संवेगरत्न सागर

रायपुर, 26 अगस्त 2026। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास की चातुर्मासिक प्रवचनमाला में मंगलवार को मुनि संवेगरत्न सागर ने श्रद्धालुओं को अनुकूलता के राग से बचने और वीतराग के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मन को लगातार अनुकूलता की ओर ले जाने वाला राग धीरे-धीरे कुदर्शन ध्यान को मजबूत करता है और जीव को धर्म एवं मोक्ष के मार्ग से दूर कर देता है।

मुनिश्री ने कहा कि मनोकल्पित भावनाओं और विकल्पों को लगातार पोषित करने से कुदर्शन ध्यान मजबूत होता है। इसमें अनुकूलता का राग प्रमुख होता है, जो व्यक्ति को धीरे-धीरे सुदेव, सुगुरु और सुधर्म से विमुख कर गलत दृष्टि की ओर ले जाता है। इसके परिणामस्वरूप मिथ्यात्व का बंध होता है और जीव जिन शासन से भव-भव की दूरी बना लेता है।

अनुकूलता का पोषण मर्यादा से दूर करता है

मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि अनुकूलता का लगातार पोषण व्यक्ति को मर्यादा लांघने के लिए प्रेरित कर सकता है। भौतिक सुख की चाह और मन की अनुकूलता को बार-बार महत्व देने से जीवन असुरक्षित होने लगता है। प्रश्न, तर्क-वितर्क और विकल्पों के माध्यम से मन धीरे-धीरे गलत दिशा में प्रवेश कर सकता है।

उन्होंने कहा कि कुसंस्कार उत्पन्न होने के बाद जीव को कुदर्शन की ओर जाने से रोकना कठिन हो जाता है। धर्मसभा में बैठे व्यक्ति के मन में भी यदि शारीरिक या मानसिक अनुकूलता के भाव बने हुए हैं तो वह कुदर्शन ध्यान का भागी बन सकता है। इसलिए अनुकूलता के राग और उससे बनने वाले संस्कारों के प्रति सजग रहना आवश्यक है।

ज्ञानपूर्वक की गई क्रिया ही मोक्ष का कारण

मुनिश्री ने कहा कि केवल धार्मिक क्रियाएं करते जाना पर्याप्त नहीं है। ज्ञानपूर्वक की गई क्रिया ही मोक्ष का कारण बनती है। यदि मन में अनुकूलता का राग बना रहता है तो वह व्यक्ति को धीरे-धीरे धर्म से दूर कर देता है। जब तक यह राग समाप्त नहीं होता, तब तक शाश्वत सुख और मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि अनुकूलता का राग आगे चलकर भय का कारण बन जाता है, जबकि वीतराग का मार्ग व्यक्ति को सन्मति और सन्मार्ग की ओर ले जाता है। अनाचार ध्यान और अज्ञान ध्यान को समझना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन कुदर्शन ध्यान सूक्ष्म होने के कारण आसानी से पकड़ में नहीं आता। यही कुदर्शन अज्ञान और मिथ्यात्व के माध्यम से जीव को पतन की ओर ले जाता है।

26 अगस्त को होगा मेहंदी-सांझी कार्यक्रम

सर्वमंगलमय वर्षावास समिति के संरक्षक श्यामसुंदर बैदमुथा ने बताया कि गिरनार नेमी तप की तपस्या के निमित्त 26 अगस्त को मुनि भगवंतों की पावन निश्रा में मेहंदी-सांझी कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

संभवनाथ जिनालय से बैंड-बाजे के साथ मेहंदी लेकर लाभार्थी परिवार और श्रावक-श्राविकाएं उपाश्रय पहुंचेंगे। यहां सभी तपस्वियों को मेहंदी भेंट की जाएगी। महिला मंडल द्वारा भक्ति गीत-संगीत के साथ सांझी का कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर तपस्वियों का तिलक, माला और श्रीफल से सम्मान किया जाएगा तथा उन्हें तपस्या की स्मृति में उपहार भेंट किए जाएंगे।

गिरनार नेमी तप कर रहे 150 तपस्वी 28 अगस्त को सामूहिक पारणा करेंगे।

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