वर्षावास का हृदय है पर्युषण महापर्व, रोज सजेगी प्रभु की आंगी
रायपुर में 15 सितंबर तक गूंजेगा धर्म-साधना का संदेश

रायपुर, 8 सितंबर 2026। विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास के दौरान सोमवार को मुनि संवेगरत्न सागर ने पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पर्युषण केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि व्यक्ति को बाहरी गतिविधियों से विराम लेकर अपने भीतर झांकने और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देता है।
‘पर्युषण वर्षावास का हृदय है’
मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व वर्षावास का हृदय है। इन दिनों व्यक्ति को अपने अनावश्यक उपक्रमों और सांसारिक प्रवृत्तियों को विराम देकर आत्मचिंतन, साधना और धर्माराधना की ओर बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्युषण आत्मा को निर्मल करने और पुण्य को बढ़ाने का अवसर लेकर आता है। तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय, सामायिक और प्रतिक्रमण जैसी साधनाओं के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे पर्युषण को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे आत्मनिरीक्षण और आत्मपरिवर्तन का पर्व बनाएं। अपने दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने और जीवन में संयम व सदाचार अपनाने का संकल्प लें।
8 सितंबर से शुरू होगा पर्वाधिराज पर्युषण
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया ने बताया कि पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का शुभारंभ 8 सितंबर से होगा और 15 सितंबर तक धार्मिक आराधना चलेगी। इस दौरान विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में वर्षावास के बीच भक्ति और धर्माराधना का विशेष वातावरण रहेगा।
बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय और आत्मचिंतन की साधना में शामिल होंगे। वहीं विवेकानंद नगर स्थित संभवनाथ जिनालय में विशेष पूजा-अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्रतिदिन सजेगा परमात्मा का भव्य दरबार
चातुर्मास समिति के महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि पर्युषण महापर्व के दौरान प्रतिदिन परमात्मा की नयनाभिराम आंगी सजाई जाएगी। दोपहर में संभवनाथ जिनालय में विशेष आंगी सजाने की परंपरा रहेगी। आकर्षक आंगी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की संभावना है।
महापर्व के दौरान प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, पूजा, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप-साधना और स्वाध्याय सहित कई धार्मिक आयोजन होंगे। मुनिभगवंत श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण, संयम और अहिंसा का संदेश देंगे।
15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व और क्षमायाचना
पर्युषण महापर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ होगा। इस दिन क्षमायाचना की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपवास और धार्मिक साधना करेंगे।
पर्युषण के दौरान प्रतिदिन सुबह और शाम प्रतिक्रमण होगा। इसके बाद 16 सितंबर को पारणा किया जाएगा।
आत्मचिंतन और संयम का संदेश
पर्युषण पर्व का मूल संदेश बाहरी आडंबर से अधिक अपने भीतर परिवर्तन लाने का है। तप और उपवास के साथ व्यक्ति अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों का आत्मावलोकन करे तथा क्रोध, अहंकार, लोभ और अन्य विकारों को दूर करने का प्रयास करे।
रायपुर के विवेकानंद नगर में 8 से 15 सितंबर तक होने वाले इस धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालु तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और क्षमाभाव के जरिए आत्मशुद्धि की साधना करेंगे।



