छत्तीसगढ़

संवत्सरी पर मुनिश्री की बड़ी सीख- ‘क्षमा मांगनी पड़े, ऐसा काम ही क्यों करें!’

आज होगा प्रतिक्रमण और बारसा सूत्र का वांचन

रायपुर, 15 सितंबर 2026। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के समापन अवसर पर 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा। इससे पहले विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा में मुनि संवेगरत्न सागर ने आत्मावलोकन और क्षमा के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए कहा कि केवल क्षमा मांग लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसा जीवन जीने का प्रयास होना चाहिए कि बार-बार उसी गलती के लिए क्षमा मांगने की जरूरत ही न पड़े।

मुनिश्री ने कहा कि हर वर्ष संवत्सरी महापर्व पर प्रतिक्रमण के माध्यम से हम अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगते हैं। लेकिन यदि प्रतिक्रमण के अगले ही दिन वही कार्य और व्यवहार दोबारा शुरू हो जाए, तो क्षमा मांगने की भावना अधूरी रह जाती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने कार्य और व्यवहार में विवेक रखना चाहिए और ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिसके लिए बाद में क्षमा मांगनी पड़े।

संवत्सरी पर दिनभर होंगे धार्मिक आयोजन

विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास के अंतर्गत 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व पर विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। धर्मसभा में बारसा सूत्र का वांचन किया जाएगा। इसके बाद मुनिभगवंतों की पावन निश्रा में चैत्य परिपाटी निकाली जाएगी।

दोपहर में होने वाले संवत्सरी प्रतिक्रमण में श्रावक-श्राविकाएं वर्षभर के अपने कार्यों का आत्मावलोकन करेंगे। इस दौरान मन, वचन और काया से हुई भूलों तथा जाने-अनजाने में किए गए पापों के लिए प्रायश्चित करते हुए क्षमायाचना की जाएगी।

लाभार्थी परिवार करेगा मूल सूत्र का बोहराव

संवत्सरी महापर्व के अवसर पर लाभार्थी परिवार की ओर से मुनि संवेगरत्न सागर को मूल सूत्र यानी बारसा सूत्र बोहराया जाएगा। धर्मसभा में लाभार्थी परिवारों द्वारा पांच ज्ञान की पूजा भी की जाएगी।

इसके बाद श्रावक-श्राविकाएं मुनिश्री के मुखारविंद से बारसा सूत्र का वांचन सुनेंगे। आयोजन के माध्यम से संयम, सदाचार और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी जाएगी।

उपाश्रय से पार्श्वनाथ जिनालय तक निकलेगी चैत्य परिपाटी

बारसा सूत्र के वांचन के बाद मुनिभगवंतों की पावन निश्रा में ज्ञानवल्लभ उपाश्रय से पार्श्वनाथ जिनालय तक चैत्य परिपाटी निकाली जाएगी। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं के शामिल होने की संभावना है।

जिनालय पहुंचने के बाद श्रद्धालु मुनिभगवंतों के साथ परमात्मा के दर्शन और वंदन करेंगे।

दोपहर 3:36 बजे शुरू होगा संवत्सरी प्रतिक्रमण

संवत्सरी महापर्व पर दोपहर 3:36 बजे से संवत्सरी प्रतिक्रमण प्रारंभ होगा। इस दौरान श्रावक-श्राविकाएं पूरे वर्ष के अपने आचरण का आत्मावलोकन करेंगे और मन, वचन एवं काया से हुई भूलों को स्मरण करते हुए प्रायश्चित और क्षमायाचना करेंगे।

संवत्सरी का संदेश केवल दूसरों से क्षमा मांगने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी गलतियों को पहचानकर उन्हें दोहराने से बचने और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का भी है। यही भावना जीवन में संयम, सदाचार और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

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