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US Visa Bond: 50 देशों के नागरिकों को देना होगा 20 हजार डॉलर, भारत को राहत

वॉशिंगटन। अमेरिका ने बिजनेस और टूरिस्ट वीजा को लेकर अपनी वीजा बॉन्ड (US Visa Bond) व्यवस्था के तहत 50 देशों की अपडेटेड सूची जारी की है। सूची में शामिल देशों के नागरिकों को B1/B2 वीजा जारी होने से पहले 10 हजार, 15 हजार या 20 हजार डॉलर तक का बॉन्ड जमा करना पड़ सकता है। हालांकि, भारत को इस सूची से बाहर रखा गया है, इसलिए भारतीय पासपोर्ट धारकों पर यह बॉन्ड नियम लागू नहीं होता। दक्षिण एशिया में बांग्लादेश, भूटान और नेपाल इस व्यवस्था में शामिल हैं।

कांसुलर अधिकारी तय करेंगे बॉन्ड की रकम

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, यह नियम उन आवेदकों पर लागू होता है जो सूची में शामिल देशों का पासपोर्ट लेकर B1/B2 वीजा के लिए आवेदन करते हैं और अन्य सभी शर्तों के तहत वीजा के लिए पात्र पाए जाते हैं।

बॉन्ड की राशि 10,000, 15,000 या 20,000 डॉलर हो सकती है। इंटरव्यू के दौरान कांसुलर अधिकारी तय करेंगे कि संबंधित आवेदक के लिए कितनी राशि का बॉन्ड जरूरी है।

भारत को सूची से रखा गया बाहर

अमेरिकी विदेश विभाग की मौजूदा सूची में भारत का नाम नहीं है। इसका मतलब है कि भारतीय पासपोर्ट धारकों को B1/B2 वीजा के लिए इस वीजा बॉन्ड को जमा करने की जरूरत नहीं है। वहीं बांग्लादेश और नेपाल के लिए यह व्यवस्था 21 जनवरी 2026 से और भूटान के लिए 1 जनवरी 2026 से लागू है।

वीजा बॉन्ड देने का मतलब वीजा पक्का नहीं

US Visa Bond: अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि बॉन्ड जमा करने से वीजा मिलने की गारंटी नहीं होती। जिन आवेदकों को बॉन्ड देने का निर्देश मिलता है, उन्हें कांसुलर अधिकारी के निर्देश के बाद ही DHS Form I-352 जमा करना होगा और अमेरिकी ट्रेजरी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Pay.gov के जरिए भुगतान करना होगा।

विभाग ने आवेदकों को चेतावनी दी है कि अधिकारी के निर्देश से पहले किसी वेबसाइट या माध्यम से बॉन्ड की रकम जमा न करें।

बॉन्ड की रकम वापस भी मिल सकती है

बॉन्ड आवेदक खुद या उसकी ओर से कोई तीसरा व्यक्ति जमा कर सकता है। इसमें दोस्त, रिश्तेदार या कारोबारी सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं। यदि बॉन्ड की सभी शर्तों का पालन किया जाता है, तो जमा की गई राशि निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस की जाती है।

अमेरिका पहुंचने और लौटने के लिए भी शर्तें

US Visa Bond: बॉन्ड देने वाले वीजा धारकों के लिए अमेरिका ने प्रवेश और निकास से जुड़ी अतिरिक्त शर्तें भी रखी हैं। उन्हें निर्धारित कमर्शियल एयरपोर्ट्स के जरिए अमेरिका में प्रवेश और बाहर निकलना होगा। CBP प्रीक्लियरेंस सुविधा वाले एयरपोर्ट भी इसमें शामिल हैं।

ऐसे यात्रियों को चार्टर विमान, जनरल एविएशन, जमीन के रास्ते या समुद्री बंदरगाहों के जरिए प्रवेश या निकास की अनुमति नहीं होगी।

ओवरस्टे के आंकड़ों के आधार पर तय होती है सूची

US Visa Bond: अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, वीजा बॉन्ड कार्यक्रम इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 221(g)(3) के तहत संचालित होता है। किन देशों को इस व्यवस्था में शामिल किया जाए, इसके लिए B1/B2 वीजा ओवरस्टे से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। ये आंकड़े अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की Entry/Exit Overstay Report से लिए जाते हैं।

अगर बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का मामला सामने आता है, तो उसे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के पास भेजा जा सकता है, जो यह तय करती है कि बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

अभी भारतीय यात्रियों के लिए क्या मतलब?

फिलहाल अमेरिकी विदेश विभाग की 2 अक्टूबर 2026 की सूची में भारत शामिल नहीं है। इसलिए भारतीय पासपोर्ट पर B1/B2 वीजा के लिए आवेदन करने वालों पर 10 हजार से 20 हजार डॉलर वाला यह अतिरिक्त बॉन्ड लागू नहीं है। हालांकि, सामान्य अमेरिकी वीजा प्रक्रिया और पात्रता संबंधी अन्य नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।

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