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85 पदक, चौथा स्थान और कई सबक: एशियन गेम्स 2026 में कहां मजबूत रहा भारत, कहां चूका?

नागोया, 4 अक्टूबर 2026। एशियन गेम्स 2026 में भारत का अभियान 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य समेत 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर समाप्त हुआ। कुल पदकों के मामले में यह हांगझोउ के 106 पदकों से पीछे रहा, लेकिन 2026 का अभियान भारत के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा पदक प्रदर्शन रहा। खास बात यह रही कि भारत ने आखिरी दौर में जोरदार वापसी करते हुए शीर्ष-4 में जगह पक्की की।

भारत के 21 स्वर्ण में सबसे बड़ा योगदान तीरंदाजी का रहा, जिसने पांच गोल्ड दिलाए। इसके अलावा शूटिंग और बॉक्सिंग ने तीन-तीन, जबकि कुश्ती, क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी ने दो-दो स्वर्ण जीते। एथलेटिक्स 24 पदकों के साथ भारत का सबसे बड़ा कुल पदक स्रोत रहा।

85 पदक, लेकिन हांगझोउ से 21 कम

हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने 106 पदक जीते थे—28 स्वर्ण, 38 रजत और 40 कांस्य। इस बार कुल संख्या घटकर 85 रही। स्वर्ण भी 28 से घटकर 21 हो गए।

हालांकि इसे सिर्फ गिरावट के आंकड़े के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। 85 पदक भारत का दूसरा सर्वश्रेष्ठ एशियाई खेल प्रदर्शन है और लगातार दूसरी बार भारत चौथे स्थान पर रहा।

आखिरी दौर में बदली पूरी तस्वीर

भारत के अभियान की सबसे दिलचस्प कहानी उसका फिनिश रहा। आखिरी दो दिनों में भारत ने 11 स्वर्ण पदक जीते और पदक तालिका में तेजी से ऊपर पहुंचा। इसी दौरान क्रिकेट, हॉकी, कुश्ती, तीरंदाजी और गोल्फ से बड़े स्वर्ण आए।

यानी अभियान का शुरुआती हिस्सा अपेक्षाकृत धीमा रहा, लेकिन निर्णायक दौर में भारत ने दबाव के बीच कई बड़े मुकाबले अपने नाम किए।

जहां भारत ने किया कमाल

1. तीरंदाजी बनी गोल्ड मशीन

भारत के लिए तीरंदाजी सबसे सफल खेल रहा। इस खेल में भारत ने पांच स्वर्ण समेत नौ पदक जीते।

सबसे खास प्रदर्शन कुमकुम अनिल मोहोद का रहा। उन्होंने महिला व्यक्तिगत रिकर्व में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा। वह एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। महिला रिकर्व टीम के स्वर्ण में भी उनकी भूमिका रही।

2. टीम स्पर्धाओं में भारत का दबदबा

क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी ने भारत को छह स्वर्ण दिलाए। पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने अपने-अपने खिताब जीते, जबकि पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने भी स्वर्ण अपने नाम किया। कबड्डी में भी दोनों वर्गों में भारत चैंपियन रहा।

पुरुष हॉकी टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर खिताब बरकरार रखा। इस जीत के साथ भारत ने 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी हासिल किया।

3. बॉक्सिंग और कुश्ती ने दिलाए बड़े स्वर्ण

बॉक्सिंग में भारत ने तीन स्वर्ण और तीन कांस्य समेत छह पदक जीते। लवलीना बोरगोहेन, परवीन हुड्डा और अंकुश ने स्वर्ण हासिल किए।

कुश्ती में भी भारत ने छह पदक जीते। अमन सहरावत ने पुरुषों के 57 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीता, जबकि सुजीत ने 65 किग्रा में गोल्ड हासिल किया।

4. गोल्फ में ऐतिहासिक स्वर्ण

प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत गोल्फ में स्वर्ण जीतकर इतिहास बनाया। यह एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत गोल्फ में भारत का पहला स्वर्ण रहा।

गोल्फ से भारत को एक स्वर्ण और एक रजत मिला, लेकिन प्रणवी का व्यक्तिगत खिताब अभियान की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।

जहां भारत से चूक हुई

1. एथलेटिक्स में पदक बहुत, स्वर्ण कम

एथलेटिक्स भारत का सबसे बड़ा पदक स्रोत रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में 24 पदक—एक स्वर्ण, नौ रजत और 14 कांस्य जीते।

लेकिन चुनौती स्वर्ण की रही। हांगझोउ में एथलेटिक्स से भारत को छह स्वर्ण मिले थे। इस बार सिर्फ महिला 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण आया। यानी पदकों की संख्या मजबूत रही, लेकिन शीर्ष पोडियम तक पहुंचने में कमी दिखाई दी।

2. शूटिंग ने पिछली बार की ऊंचाई नहीं दोहराई

शूटिंग ने कुल 15 पदक जरूर दिलाए, लेकिन स्वर्ण की संख्या तीन रही। हांगझोउ में भारत ने शूटिंग में सात स्वर्ण जीते थे।

इस बार नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप में स्वर्ण जीतकर भारत को बड़ी राहत दी। उन्होंने काइनन चेनाई के साथ मिश्रित ट्रैप में भी स्वर्ण जीता। कमलजीत और सुरुचि सिंह ने मिश्रित 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड हासिल किया।

वहीं दो ओलंपिक पदक जीत चुकीं मनु भाकर चार स्पर्धाओं में हिस्सा लेने के बावजूद कोई पदक नहीं जीत सकीं।

3. बैडमिंटन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा

बैडमिंटन में भारत को सिर्फ एक कांस्य पदक, पुरुष टीम स्पर्धा में मिला। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारत पदक नहीं जीत सका।

पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और अन्य खिलाड़ियों से उम्मीदें थीं, लेकिन व्यक्तिगत स्पर्धाओं में अभियान पदक तक नहीं पहुंच पाया। टूर्नामेंट के बेहद व्यस्त कार्यक्रम और कम रिकवरी समय को लेकर खिलाड़ियों और टीमों ने भी सवाल उठाए।

4. टेनिस में चार दशक का सूखा

टेनिस भारत के लिए सबसे बड़ी निराशाओं में से एक रहा। भारत पहली बार करीब चार दशक में एशियन गेम्स से बिना किसी टेनिस पदक के लौटा।

यह प्रदर्शन उस खेल में लंबे समय से चली आ रही भारतीय सफलता के मुकाबले बड़ा बदलाव है और 2026 अभियान के बाद ध्यान देने वाले क्षेत्रों में शामिल रहेगा।

भारत के अभियान के 10 सबसे बड़े चेहरे

1. कुमकुम अनिल मोहोद

महिला व्यक्तिगत रिकर्व में ऐतिहासिक स्वर्ण जीतकर अभियान की सबसे यादगार उपलब्धियों में जगह बनाई। भारत की तीरंदाजी ने कुल पांच स्वर्ण जीते।

2. नीरू ढांडा

शूटिंग के दबाव वाले अभियान में महिला ट्रैप और मिश्रित ट्रैप में दो स्वर्ण जीतकर भारत की प्रमुख पदक विजेता बनीं।

3. प्रणवी उर्स

महिला व्यक्तिगत गोल्फ में भारत का पहला एशियन गेम्स स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा।

4. अमन सहरावत

57 किग्रा फ्रीस्टाइल में स्वर्ण जीतकर कुश्ती में भारत के अभियान को मजबूत किया।

5. लवलीना बोरगोहेन

75 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतकर एशियन गेम्स बॉक्सिंग में स्वर्ण जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय महिला बनीं।

6. गुलवीर सिंह

एथलेटिक्स में 10,000 मीटर और 1500 मीटर में रजत तथा 5000 मीटर में कांस्य जीतकर तीन पदक हासिल किए।

7. विथ्या रामराज

400 मीटर बाधा दौड़ में कांस्य के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और 4×400 मीटर रिले की स्वर्ण विजेता टीम का हिस्सा रहीं।

8. हरमनप्रीत सिंह

कप्तान के रूप में पुरुष हॉकी टीम को लगातार दूसरी बार स्वर्ण दिलाया। मलेशिया के खिलाफ फाइनल में उन्होंने दो गोल किए।

9. अभिषेक शर्मा

पाकिस्तान के खिलाफ पुरुष क्रिकेट के स्वर्ण पदक मुकाबले में 28 गेंदों पर 61 रन की तेज पारी खेली और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

10. कमलजीत

सुरुचि सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में स्वर्ण जीतकर शूटिंग के स्वर्ण खाते में अहम योगदान दिया।

सबसे बड़ा सबक क्या?

एशियन गेम्स 2026 ने भारत के लिए एक साथ दो तस्वीरें पेश कीं। एक तरफ 85 पदक और चौथा स्थान बताता है कि भारतीय खेलों का पदक आधार अब कई खेलों में फैला हुआ है। दूसरी तरफ 21 स्वर्ण और हांगझोउ के मुकाबले 21 कम कुल पदक यह भी दिखाते हैं कि सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है—स्वर्ण पदकों की निरंतरता और व्यक्तिगत स्पर्धाओं में गहराई भी जरूरी है।

तीरंदाजी, बॉक्सिंग, कुश्ती, हॉकी, क्रिकेट और कबड्डी ने भारत को निर्णायक मौकों पर स्वर्ण दिलाए। वहीं एथलेटिक्स में स्वर्ण की कमी, शूटिंग में पिछली सफलता का दोहराव न होना और बैडमिंटन-टेनिस में निराशाजनक प्रदर्शन अगले बड़े लक्ष्य से पहले ध्यान देने वाले क्षेत्र हैं।

निष्कर्ष साफ है—भारत का एशियाड अभियान पदकों के लिहाज से मजबूत रहा, लेकिन प्रदर्शन की असली चुनौती अब इस 85 से आगे बढ़कर ज्यादा स्वर्ण और ज्यादा खेलों में लगातार पोडियम फिनिश हासिल करना होगी।

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