छत्तीसगढ़

SIR पर अकबर का बड़ा हमला, बोले- ‘भारत निर्वाचन आयोग है, सरकार का आयोग नहीं!’

रायपुर, 13 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में ‘भारत निर्वाचन आयोग’ है, न कि ‘भारत सरकार निर्वाचन आयोग’। अकबर ने शिफ्टेड और एब्सेंट श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने की मांग करते हुए एसआईआर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।

निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता पर उठाए सवाल

मोहम्मद अकबर ने कहा कि जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक भूमिका पर सवाल उठते हैं, तो आयोग की ओर से जवाब देने के बजाय सरकार के प्रवक्ता सामने क्यों आते हैं? उनके मुताबिक, निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और सरकार की ओर से उसकी वकालत किया जाना आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।

एसआईआर के बाद करीब 25 लाख नाम हटने का दावा

अकबर ने एसआईआर प्रक्रिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल मतों का अंतर 6 लाख 32 हजार 382 यानी 4.04 प्रतिशत था। वहीं, उनके अनुसार एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची से 24 लाख 99 हजार 823 नाम हटाए गए।

उन्होंने दावा किया कि इनमें से 19 लाख 13 हजार 540 मतदाताओं को ‘शिफ्टेड’ या ‘एब्सेंट’ श्रेणी में रखा गया। अकबर का कहना है कि रोजगार, कामकाज या शिक्षा के कारण अपने पते पर अस्थायी रूप से मौजूद नहीं रहने वाले लोगों के नाम भी इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं।

शिफ्टेड-अब्सेंट मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने की मांग

मोहम्मद अकबर ने सवाल उठाया कि यदि कोई मतदाता किसी दिन अपने घर पर मौजूद नहीं मिलता, तो क्या केवल इसी आधार पर उसे मतदाता सूची से बाहर किया जाना उचित है? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित मतदाताओं को व्यक्तिगत नोटिस देने और उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बिना उनके नाम हटाए जाने से मताधिकार पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने निर्वाचन आयोग से शिफ्टेड और एब्सेंट श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक करने तथा मामले में स्वतः संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने की मांग की।

निष्पक्ष पुनरीक्षण पर दिया जोर

अकबर ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण वास्तविक त्रुटियों को सुधारने के लिए होना चाहिए, न कि पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से छत्तीसगढ़ सहित देशभर में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने की अपील की।

नोट: मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़े और प्रक्रिया को लेकर जताई गई आपत्तियां मोहम्मद अकबर के बयान पर आधारित हैं।

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