छत्तीसगढ़

साइबर अपराधों पर कार्रवाई के साथ रोकथाम पर जोर

छत्तीसगढ़ पुलिस के अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा सुरक्षा का संदेश

सात सप्ताह में 5 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम, सोशल मीडिया पोस्ट को मिले 6 करोड़ से ज्यादा व्यूज; आठ जिलों की नवाचारी पहल को मिला सम्मान…

रायपुर, 19 अक्टूबर 2026। डिजिटल लेनदेन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरुपयोग जैसी घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने कार्रवाई के साथ जनजागरूकता पर भी जोर दिया है। इसी दिशा में संचालित सात सप्ताह के विशेष साइबर जागृति अभियान के दौरान प्रदेशभर में 5 लाख से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए और 1 करोड़ 70 लाख से अधिक नागरिकों तक सीधे साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।

15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक चले इस अभियान में प्रदेश की 34 पुलिस इकाइयों ने भाग लिया। अभियान के दौरान 5.5 लाख से अधिक जागरूकता सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की सहभागिता भी दर्ज की गई। पुलिस का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराधों के तौर-तरीकों की जानकारी देकर उन्हें धोखाधड़ी के प्रयासों को समय रहते पहचानने और उनसे बचने के लिए सक्षम बनाना रहा।

गांवों से शहरों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश

साइबर जागृति अभियान को केवल शहरों और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित नहीं रखा गया। पुलिस ने ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं, हाट-बाजारों, धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद किया। विद्यार्थियों, महिलाओं, युवाओं, ग्रामीणों और वरिष्ठ नागरिकों को साइबर अपराधों के बदलते तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

अभियान को सात विषय आधारित सप्ताहों में बांटा गया। इनमें डिजिटल सुरक्षा, यूपीआई एवं ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक साइबर सुरक्षा संकल्प जैसे विषय शामिल रहे।

नागरिकों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने, फर्जी कॉल से सावधान रहने, नकली निवेश योजनाओं को पहचानने और ओटीपी, पासवर्ड तथा यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई। साथ ही डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धमकाने वालों से सतर्क रहने के लिए जागरूक किया गया।

जिलों ने अपनाए जागरूकता के नए तरीके

अभियान के दौरान विभिन्न जिलों में स्थानीय परिस्थितियों और सामाजिक गतिविधियों के अनुरूप नवाचार किए गए, ताकि साइबर सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

  • मुंगेली: ग्राम पंचायतों और विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई।
  • गरियाबंद: मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को जागरूक किया गया, ताकि वे अपने परिवारों और समुदायों तक भी संदेश पहुंचा सकें।
  • दुर्ग: ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के तहत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया।
  • जांजगीर-चांपा: ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के जरिए लगभग 1 लाख 61 हजार लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।
  • बिलासपुर: आकाशवाणी के लाइव फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से लगभग आठ लाख श्रोताओं को साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई।
  • कोंडागांव: साइबर चेतना रथ के जरिए जागरूकता का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।
  • रायपुर: बिजली बिलों के माध्यम से साइबर ठगी से संबंधित चेतावनी संदेश प्रसारित किए गए।
  • रायगढ़: लघु फिल्म प्रतियोगिता के माध्यम से साइबर अपराधों और उनसे बचाव के उपायों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया।

इन पहलों के जरिए साइबर सुरक्षा की जानकारी को स्थानीय परंपराओं, सामाजिक आयोजनों और रोजमर्रा की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। युवाओं को साइबर प्रहरी के रूप में जोड़ने पर भी जोर दिया गया, ताकि वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को जागरूक कर सकें।

सोशल मीडिया पोस्ट को मिले 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज

साइबर जागृति अभियान में डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया गया। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले।

रायपुर में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के माध्यम से साइबर अपराधों के तरीकों और उनसे बचाव के संदेश को सरल तथा प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया।

साइबर ठगी के नेटवर्क पर भी कार्रवाई

जनजागरूकता के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले नेटवर्क के विरुद्ध भी कार्रवाई कर रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार, साइबर ठगी में उपयोग होने वाले म्यूल बैंक खातों, ऐसे खाते खुलवाने में कथित रूप से संलिप्त बैंककर्मियों और फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने 9 अक्टूबर को रायपुर में आयोजित साइबर जागृति अभियान के अभिनंदन समारोह में बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी दर में वृद्धि हुई है।

पुलिस नागरिकों को साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने के लिए भी जागरूक कर रही है। समय पर शिकायत करने से धोखाधड़ी की राशि को रोकने या वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ सकती है।

आठ जिलों को राज्यस्तरीय समारोह में सम्मान

साइबर जागृति अभियान की उपलब्धियों और जिलों की नवाचारी पहलों को प्रोत्साहित करने के लिए 9 अक्टूबर 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्यस्तरीय अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए।

साइबर जागरूकता के क्षेत्र में अभिनव पहल करने वाले कोंडागांव, रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, दुर्ग, गरियाबंद और मुंगेली जिलों को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक हो गई है। साइबर अपराधों से बचाव केवल पुलिस और शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने अभियान को निरंतर जारी रखने और इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने पर जोर दिया।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए लगातार जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों, ग्राम सभाओं, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों तक पहुंचकर लोगों को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी जा रही है।

सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का अहम आधार

साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों की जानकारी के अभाव और भय का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को पहले से जागरूक करना, संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने की क्षमता विकसित करना और समय पर शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है।

छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान इसी सोच के तहत चलाया गया। गांवों और शहरों तक पहुंच, स्थानीय नवाचारों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग से साइबर सुरक्षा का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया गया है। अभियान के आयोजकों के सामने अब इन प्रयासों को लगातार जारी रखने और जागरूकता को दैनिक डिजिटल व्यवहार का हिस्सा बनाने की चुनौती है।

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