अमेरिका की कार्रवाइयों के कारण शांति वार्ता खतरे में: ईरान

तेहरान, 21 अप्रैल 2026। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी “उकसाने वाली कार्रवाइयां” और युद्धविराम उल्लंघन दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता के लिए बड़ी बाधा बन रही हैं।
अराघची ने अपने पाकिस्तानी और रूसी समकक्षों के साथ बातचीत में ईरानी वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ अमेरिकी कदमों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कंटेनर पोत ‘टौस्का’ और उसके चालक दल की कथित जब्ती का भी जिक्र किया और वॉशिंगटन की “विरोधाभासी नीतियों” पर सवाल उठाए।
8 अप्रैल को लागू हुआ युद्धविराम अभी भी नाजुक स्थिति में बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने तेहरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी और इस्लामाबाद में पहले दौर की मेजबानी भी की थी। हालांकि, ईरान ने अगले दौर में शामिल होने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
ईरान की ओर से साफ किया गया है कि वार्ता में भागीदारी अमेरिका द्वारा कुछ शर्तें पूरी करने पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना और “अत्यधिक मांगों” से पीछे हटना शामिल है।
इस बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी कहा कि अभी तक अगले दौर की बातचीत को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने अमेरिका पर कूटनीति की बात करते हुए भी विरोधाभासी रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
तनाव की पृष्ठभूमि में हालिया घटनाएं भी शामिल हैं, जहां तेहरान और अन्य शहरों पर अमेरिका-इज़रायल के संयुक्त हमलों के बाद स्थिति और बिगड़ी। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की थी।
ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा और आगे की कूटनीति अमेरिका के व्यवहार पर निर्भर करेगी।



