‘कांतारा’ से ‘जय हनुमान’ तक: ऋषभ शेट्टी की कहानी में बढ़ती आध्यात्मिक गहराई

मुंबई, 7 अप्रैल 2026। भारतीय सिनेमा में जहां अक्सर भव्यता और ग्लैमर हावी रहता है, वहीं ऋषभ शेट्टी ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी फिल्म कांतारा ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि भारतीय लोककथाओं और परंपराओं को नई पहचान दिलाते हुए एक सांस्कृतिक आंदोलन भी खड़ा किया।
अब ऋषभ शेट्टी अपनी अगली परियोजना जय हनुमान के साथ एक और बड़े और आध्यात्मिक विषय की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि कहानी कहने के एक गहरे और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाती है।
ऋषभ शेट्टी की खासियत यह है कि वे अपनी जड़ों और क्षेत्रीय परंपराओं से प्रेरित कहानियों को मुख्यधारा सिनेमा में इस तरह प्रस्तुत करते हैं कि वे वैश्विक दर्शकों से भी जुड़ जाती हैं। अभिनेता, लेखक और निर्देशक—तीनों भूमिकाओं में उनकी पकड़ उन्हें “वन मैन आर्मी” बनाती है।
‘कांतारा’ की सफलता, जिसने करीब 1300 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया, इस बात का प्रमाण है कि दर्शक अब ऐसी कहानियों को भी उतना ही पसंद कर रहे हैं, जो संस्कृति, आस्था और परंपराओं से जुड़ी हों।
‘जय हनुमान’ के साथ ऋषभ शेट्टी एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आस्था और पहचान की अभिव्यक्ति बनता नजर आ रहा है। फिल्म जगत में उनकी यह यात्रा भारतीय संस्कृति को नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



