‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी जारी, जरूरत पड़ी तो होगा 2.0 : सेना प्रमुख

नई दिल्ली, 30 मई 2026। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी समाप्त नहीं हुआ है और भारतीय सशस्त्र बल किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर तीनों सेनाएं मिलकर ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ को भी अंजाम देने में सक्षम हैं।
पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में जनरल द्विवेदी ने कहा कि फिलहाल शत्रुता पर अस्थायी विराम है, लेकिन सेना पूरी सतर्कता के साथ तैयारियों में जुटी हुई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को और मजबूत करने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप युद्ध क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सेना प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब संघर्ष केवल थल, जल और वायु तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर और सूचना युद्ध जैसे नए क्षेत्र भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध में जीत पहले दिमाग में हासिल होती है और सूचना के मोर्चे पर एकजुट राष्ट्र हमेशा मजबूत स्थिति में रहता है।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह साबित किया है कि भारत उकसावे का सटीक, संतुलित और निर्णायक जवाब देने में सक्षम है। उनके अनुसार, इस अभियान ने देश की सैन्य प्रतिक्रिया का नया मानक स्थापित किया है, जिसे आगे बनाए रखने की जिम्मेदारी युवा सैन्य अधिकारियों पर होगी।
उन्होंने आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। सेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य में प्रत्येक सैनिक को ड्रोन संचालित करने और उसका प्रभावी उपयोग करने में दक्ष होना चाहिए। इसी सोच के तहत सेना जवानों को ड्रोन, सिमुलेटर और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का व्यापक प्रशिक्षण दे रही है। उन्होंने अपनी ‘ईगल ऑन द आर्म’ अवधारणा का जिक्र करते हुए कहा कि हर सैनिक के हाथ में एक “ईगल” यानी ड्रोन होना चाहिए।
परेड को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कैडेट्स से कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियां पारंपरिक नहीं होंगी और उन्हें त्वरित निर्णय क्षमता, तकनीकी दक्षता तथा संयुक्त सैन्य संचालन की भावना के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तीनों सेनाओं के उत्कृष्ट समन्वय को एनडीए में मिलने वाले संयुक्त प्रशिक्षण का परिणाम बताया।
इस अवसर पर सेना प्रमुख ने अपने सैन्य जीवन की यादें साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं 42 वर्ष पहले इसी अकादमी से पास आउट हुए थे। उन्होंने सभी कैडेट्स को सफल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चीता स्क्वाड्रन सहित सभी प्रतिभागियों की सराहना की। 12 मित्र देशों से आए 24 विदेशी कैडेट्स का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एनडीए से निकलने वाले सभी अधिकारी समान मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ते हैं।



