छत्तीसगढ़

बेमेतरा में खुलेगी प्रदेश की पहली आधुनिक ओपन जेल, अधिसूचना जारी

रायपुर, 15 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने जेल सुधार और बंदियों के पुनर्वास की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में प्रदेश की पहली आधुनिक खुली जेल (ओपन जेल) स्थापित करने का निर्णय लिया है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल मंत्री विजय शर्मा के अनुमोदन के बाद जेल विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का मानना है कि यह पहल बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, आत्मनिर्भर बनाने और सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जेल विभाग केवल दंड देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों के सुधार और पुनर्वास की जिम्मेदारी भी निभाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि खुली जेल की अवधारणा बंदियों को नया जीवन शुरू करने का अवसर प्रदान करेगी।

200 बंदियों की क्षमता, 10.20 हेक्टेयर में विकसित होगी जेल

महानिदेशक जेल हिमांशु गुप्ता ने बताया कि बेमेतरा के ग्राम पथर्रा में लगभग 10.20 हेक्टेयर भूमि पर 200 बंदियों की क्षमता वाली आधुनिक खुली जेल विकसित की गई है। यहां बंदियों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, मनोरंजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था रहेगी। साथ ही जेल अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों के लिए भी आवासीय परिसर तैयार किए गए हैं।

चारदीवारी नहीं, विश्वास के साथ सुधार

खुली जेल की विशेषता यह होगी कि बंदियों को पारंपरिक जेलों की तरह चारदीवारी में बंद नहीं रखा जाएगा। उन्हें सीमित निगरानी में सामान्य जीवन जीने का अवसर मिलेगा, जहां वे विभिन्न रोजगारपरक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे। हालांकि उन्हें जेल विभाग के सभी नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

अच्छे आचरण वाले बंदियों को मिलेगा अवसर

प्रारंभिक चरण में केवल उन आजीवन कारावास के बंदियों को खुली जेल में रखा जाएगा, जिन्होंने जेल में 11 वर्ष या उससे अधिक की सजा पूरी कर ली हो और जिनका आचरण उत्कृष्ट रहा हो। ऐसे बंदियों का चयन महानिदेशक जेल की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। चयन में यह भी देखा जाएगा कि उनके दोबारा गंभीर अपराध में शामिल होने की संभावना न हो और उनका सामाजिक व्यवहार सकारात्मक हो।

कौशल प्रशिक्षण से बनेंगे आत्मनिर्भर

खुली जेल में बंदियों को गौशाला, डेयरी, मछली पालन, कुक्कुट पालन, सब्जी उत्पादन, बागवानी, काष्ठ कला, स्क्रीन प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब निर्माण, फैब्रिकेशन, भवन निर्माण, सिलाई, बुनाई, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, कंप्यूटर संचालन समेत कई रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार ने इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए समझौते के तहत रिहाई के बाद स्वरोजगार शुरू करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की है।

‘आस्था कैफे’ और एंपोरियम से जुड़ेगा समाज

बेमेतरा-सिमगा मुख्य मार्ग पर जिला प्रशासन के सहयोग से ‘आस्था कैफे’ और ग्रॉसरी शॉप संचालित की जाएगी, जहां बंदी कार्य कर सकेंगे। वहीं खुली जेल परिसर के मुख्य द्वार पर स्थापित एंपोरियम में बंदियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री की जाएगी, जिससे उन्हें आय अर्जित करने के साथ समाज से सकारात्मक जुड़ाव का अवसर मिलेगा।

सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की ओर बड़ा कदम

सरकार का मानना है कि खुली जेल व्यवस्था से बंदियों को परिवार के साथ बेहतर सामाजिक संबंध बनाए रखने, मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने और जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में पुनर्स्थापित होने का अवसर मिलेगा। यह मॉडल राज्य में सुधारात्मक और मानवीय न्याय व्यवस्था को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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