अंतराष्ट्रीय

तिब्बत में टूटा ग्लेशियर, उत्तरी नेपाल में फ़्लैश फ्लड : 7 की मौत, 18 लापता

PM बालेंद्र शाह ने संभाली कमान

काठमांडू। चीन सीमा से सटे उत्तरी नेपाल में बुधवार तड़के भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। रसुवा जिले में आई फ्लैश फ्लड से अब तक 7 लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 4 जवानों और रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारियों समेत कम से कम 18 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ ने तिमुरे और स्याब्रुबेसी समेत सीमावर्ती इलाकों में घरों, वाहनों, पुलों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है।

आपदा की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर राहत और बचाव अभियान की समीक्षा की। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, सिंह दरबार स्थित प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय में हुई बैठक में रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन के संघीय सांसदों के साथ बाढ़ से हुए नुकसान, नदी किनारे बसे इलाकों की स्थिति और बचाव-राहत कार्यों पर चर्चा की गई।

तिब्बत की ओर से आया बाढ़ का पानी

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 9 बजे भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की सूचना मिली। शुरुआती जानकारी में बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आने की आशंका जताई गई है। रसुवा जिले के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में तिमुरे और स्याब्रुबेसी की सीमावर्ती बस्तियां शामिल हैं।

नेपाल सेना के अनुसार, बाढ़ में वाहन, व्यावसायिक सामान और अन्य संपत्तियां बह गईं। रसुवा सीमा शुल्क परिसर में खड़े कई वाहन और सामान भी पानी में बह गए। हाल ही में बनाया गया एक पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गया।

रसुवा के प्रशासन प्रमुख नरेंद्र परियार ने कहा कि गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजना स्थलों के बह जाने की खबरें मिली हैं और भारी जान-माल के नुकसान की आशंका है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों में आकलन दल अभी जानकारी जुटा रहे हैं, इसलिए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है।

15 हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित

बाढ़ ने रसुवा के बिजली क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। नेपाल के स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अनुसार, 15 हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 10 चालू और 5 निर्माणाधीन परियोजनाएं शामिल हैं।

उत्तरी रसुवा में चीन सीमा के पास एक सीमा चौकी पर तैनात APF के चार जवानों के अलावा स्थानीय मीडिया के मुताबिक सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी भी संपर्क से बाहर हैं। ऐसे में लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

PM शाह ने दिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश

प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की ताजा स्थिति और बचाव, खोज एवं राहत कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा और राहत के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने संबंधित विभागों को निचले नदी तटीय इलाकों में अतिरिक्त सावधानी बरतने और विस्थापित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोगों से भी राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करने की अपील की।

WHO भेज रहा दवाएं और इमरजेंसी टेंट

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी स्वास्थ्य एवं राहत सामग्री भेजने की घोषणा की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, करीब 1,000 लोगों के लिए जरूरी दवाएं और स्वास्थ्य उपकरण भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों के लिए 24 वर्ग मीटर आकार के 15 इमरजेंसी टेंट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

काठमांडू के बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में बाढ़ पीड़ितों के लिए 100 इमरजेंसी बेड निर्धारित किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक तीन घायल लोगों को बचाकर काठमांडू लाया जा चुका है।

आपात स्वास्थ्य सेवाओं के लिए काठमांडू के फेडरल अस्पताल, ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेंटर, बागमती और गंडकी प्रांतों के स्वास्थ्य मंत्रालयों के साथ समन्वय किया जा रहा है। नेपाल रेड क्रॉस, लायंस और नेपाल स्काउट्स को भी राहत कार्यों में सहयोग के लिए जोड़ा गया है।

पांच जिलों के लिए चेतावनी

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा के अलावा नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। लोगों से हालात बिगड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।

चीन सीमा से सटे दुर्गम पहाड़ी इलाके में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ से कटे क्षेत्रों तक पहुंच बनाना और लापता लोगों की तलाश करना है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों से पूरी जानकारी मिलने के बाद ही आपदा से हुए वास्तविक जान-माल के नुकसान का आकलन हो सकेगा।

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