One Nation One Time: भारत में अब एक ही होगा आधिकारिक समय
फरवरी-मार्च 2027 से लागू होंगे नए IST नियम

नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। भारत सरकार ने देश में समय के इस्तेमाल को एक समान और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने ‘विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026’ अधिसूचित किए हैं। इन नियमों के तहत भारतीय मानक समय यानी IST को देशभर में कानूनी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक और अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए सामान्य समय-संदर्भ बनाया गया है। नियम 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित किए गए और राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिन बाद प्रभावी होंगे।
‘एक देश, एक समय’ की दिशा में बड़ा कदम
नए नियमों का उद्देश्य देश में अलग-अलग समय स्रोतों से पैदा होने वाले अंतर को कम करना और महत्वपूर्ण डिजिटल एवं तकनीकी प्रणालियों के लिए एक सटीक, प्रमाणित और ट्रेसेबल समय-संदर्भ उपलब्ध कराना है। सरकार के मुताबिक बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, दूरसंचार, रेलवे, बिजली व्यवस्था, कंप्यूटर नेटवर्क और सरकारी रिकॉर्ड जैसे क्षेत्रों में सटीक टाइम-स्टैम्पिंग बेहद महत्वपूर्ण है।
नियम लागू होने से पहले सरकार ने 180 दिनों की अवधि रखी है, ताकि सरकारी विभाग, कंपनियां, संस्थान और अन्य संगठन अपने सिस्टम की समीक्षा कर आवश्यक तकनीकी बदलाव कर सकें।
विदेशी टाइम सोर्स पर निर्भरता घटाने की तैयारी
सरकार ‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल के तहत भारत में ही सटीक IST उपलब्ध कराने का बुनियादी ढांचा विकसित कर रही है। इसके लिए CSIR-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (NPL), ISRO और देश की कानूनी मापविज्ञान प्रयोगशालाओं समेत विभिन्न संस्थानों की भूमिका होगी।
नियमों में NavIC समेत अन्य अधिकृत भारतीय टाइमिंग सोर्स का इस्तेमाल भी प्रावधानित किया गया है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए बाहरी समय-स्रोतों पर निर्भरता कम करना और देश के भीतर सुरक्षित एवं विश्वसनीय समय वितरण व्यवस्था तैयार करना है।
बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट में सटीक टाइम-स्टैम्पिंग
आज बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट सिस्टम में प्रत्येक लेन-देन का समय दर्ज किया जाता है। अलग-अलग प्रणालियों के समय में अंतर होने पर ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड, सिस्टम के समन्वय और किसी तकनीकी समस्या की जांच में मुश्किलें आ सकती हैं।
नए नियमों के तहत अधिकृत और ट्रेसेबल IST संदर्भ का इस्तेमाल महत्वपूर्ण प्रणालियों में समय की एकरूपता बढ़ाने में मदद करेगा। इससे डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंकिंग सिस्टम और अन्य समय-निर्भर सेवाओं में रिकॉर्डिंग और समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
रेलवे, बिजली और परिवहन क्षेत्र में भी फायदा
सटीक समय-सिंक्रोनाइजेशन केवल बैंकिंग तक सीमित नहीं है। रेलवे, हवाई परिवहन, बिजली ग्रिड, दूरसंचार और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में अलग-अलग सिस्टम के बीच समय का तालमेल बेहद अहम होता है।
सरकार के मुताबिक एक सामान्य IST संदर्भ से रेलवे, परिवहन, पावर सिस्टम और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में समय-निर्भर प्रणालियों के बेहतर समन्वय में मदद मिलेगी।
‘व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी’ से मिली नई दिशा
‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल के तहत भारत ने White Rabbit Technology आधारित IST Dissemination Demonstration Network भी तैयार किया है। जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित Regional Reference Standard Laboratory (RRSL) में इस नेटवर्क का प्रदर्शन किया गया।
सरकार के अनुसार इस तकनीक के जरिए बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, परिवहन और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय मानक समय के वितरण का प्रदर्शन किया गया है। CSIR-NPL, ISRO, SEBI, NSE और BSNL समेत विभिन्न संस्थाएं इस पहल से जुड़ी रही हैं।
साइबर सुरक्षा में क्यों महत्वपूर्ण है सटीक समय?
डिजिटल दुनिया में किसी घटना का सही समय दर्ज होना बेहद महत्वपूर्ण है। किसी साइबर हमले, सिस्टम फेलियर या डिजिटल लेन-देन की जांच में अलग-अलग सिस्टम के टाइम-स्टैम्प की तुलना की जाती है। एक विश्वसनीय और समान समय-संदर्भ से घटनाओं का क्रम समझने और सिस्टम के बीच समन्वय बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि नए नियम लागू होते ही साइबर अपराध या डिजिटल फ्रॉड खत्म हो जाएंगे। इन नियमों का प्रमुख उद्देश्य समय के संदर्भ को एकरूप, सटीक और प्रमाणित बनाना है।
फरवरी या मार्च 2027 में लागू होंगे नियम
नियम 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित किए गए हैं और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिन बाद लागू होंगे। इस अवधि का इस्तेमाल सरकारी विभागों, उद्योगों और अन्य संस्थानों को अपने टाइम-सिंक सिस्टम को नए मानक के अनुरूप तैयार करने के लिए करना होगा।
भारत पहले से IST का इस्तेमाल करता है, लेकिन इन नए नियमों का महत्व इस बात में है कि अब महत्वपूर्ण कानूनी, वाणिज्यिक, प्रशासनिक और समय-निर्भर डिजिटल प्रणालियों के लिए अधिकृत और ट्रेसेबल भारतीय समय-संदर्भ को संस्थागत रूप दिया जा रहा है।
‘वन नेशन, वन टाइम’ पहल को इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए भारत अपनी महत्वपूर्ण डिजिटल और तकनीकी प्रणालियों के लिए अधिक मजबूत, विश्वसनीय और स्वदेशी समय-वितरण व्यवस्था विकसित करना चाहता है।



