छत्तीसगढ़

अक्षय निधि घट की तरह ज्ञान से आत्मा को भरने का करें पुरुषार्थ : मुनि संवेगरत्न सागर

विवेकानंद नगर में 16 दिवसीय अक्षय निधि समवशरण विजय कषाय तप का शुभारंभ

रायपुर, 1 सितंबर 2026। विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में चल रहे सर्वमंगलमय वर्षावास 2026 के दौरान तप-साधना और धार्मिक आराधना का क्रम जारी है। इसी कड़ी में 31 अगस्त से मुनि संवेगरत्न सागर आदि ठाणा के पावन सानिध्य में 16 दिवसीय अक्षय निधि समवशरण विजय कषाय तप का शुभारंभ हुआ। सुबह 8.30 बजे मंगल कलश की स्थापना के साथ तप की विधिवत शुरुआत हुई। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने जिनवाणी का लाभ लिया।

अक्षय निधि घट के साथ आत्मा को ज्ञान से भरने का संदेश

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि 16 दिनों तक चलने वाले इस तप में प्रतिदिन श्रद्धालु अक्षय निधि घट को अक्षत और उत्तम द्रव्य से भरेंगे। इसी तरह प्रत्येक मनुष्य को अपनी आत्मा रूपी घट को ज्ञान से भरने का पुरुषार्थ करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि आत्मा ज्ञान रूपी वर्षा से नहीं भीगी तो तप और साधना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। ज्ञान के बिना दर्शन की शुद्धि संभव नहीं है। आत्मा को ज्ञान से रंजित किए बिना जीवन और भव का वास्तविक सुधार नहीं हो सकता।

मुनिश्री ने कहा कि अक्षय निधि तप को केवल द्रव्य और अनुष्ठान तक सीमित रखने के बजाय भावों से जोड़कर साधना करना आवश्यक है। जब तक आत्मा रूपी घट ज्ञान से परिपूर्ण नहीं होगा, तब तक कषायों पर विजय प्राप्त करना कठिन रहेगा। तप को शुद्ध भावों के साथ करने पर ही साधना आत्मा को मोक्ष के मार्ग की ओर ले जा सकती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने भीतर अखंड ज्ञान का पुंज विकसित करने और आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर पुरुषार्थ करने का आह्वान किया।

प्रपंची, प्रलापी और प्रकोपी दोषों से बचने की सीख

धर्मसभा में मुनि शाश्वतरत्न सागर ने प्रपंची, प्रलापी और प्रकोपी तीन दोषों से बचने की सीख दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता को छल-कपट, झूठ और प्रपंच से दूर रहना चाहिए, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार से ही संस्कार ग्रहण करते हैं।

उन्होंने कहा कि अनावश्यक बोलने की आदत यानी प्रलाप पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में कटुता पैदा कर सकती है। वहीं बात-बात पर क्रोध करने वाला व्यक्ति प्रकोपी बन जाता है और धीरे-धीरे उसके प्रति लोगों का सम्मान कम होने लगता है। इसलिए जीवन में इन तीनों दोषों का त्याग कर संयमित जीवन, मधुर वाणी और शांत व्यवहार अपनाना चाहिए।

15 दिन एकासना, 16वें दिन उपवास

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि अक्षय निधि समवशरण विजय कषाय तप के अंतर्गत तपस्वी 15 दिनों तक एकासना करेंगे, जबकि 16वें दिन उपवास रखा जाएगा। मंगल कलश स्थापना के साथ तप की विधिवत शुरुआत हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि अक्षय निधि तप की पूर्णता के बाद 8 दिवसीय मोक्ष तप का शुभारंभ होगा। इसमें तपस्वी सात दिनों तक एकासना करेंगे और आठवें दिन उपवास रखेंगे। वर्षावास के दौरान आयोजित इन तप-साधनाओं में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं श्रद्धा के साथ सहभागी बन रहे हैं।

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