अंतराष्ट्रीय

ईरान ने रखा 7 दिन का फॉर्मूला, ट्रंप ने किया रिजेक्ट…

होर्मुज और परमाणु वार्ता पर बढ़ा तनाव

वॉशिंगटन। ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिन की एक प्रस्तावित योजना रखी है, जिसके तहत अमेरिकी कदमों के बाद छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और सातवें दिन अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता बहाल करने की बात कही गई है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिका को पहले कुछ शर्तों पर कार्रवाई करनी होगी। इनमें ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव और नाकेबंदी कम करना, तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में राहत तथा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना शामिल है।

अराघची ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार है और यदि अमेरिका जरूरी कदम उठाता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। उनके अनुसार, अमेरिकी पक्ष के लिए शुरुआती कदमों को पूरा करने में करीब चार से पांच दिन लग सकते हैं। इसके बाद छठे दिन जलडमरूमध्य खोला जाएगा और सातवें दिन व्यापक समझौते के लिए बातचीत शुरू होगी।

ट्रंप ने कहा- प्रस्ताव स्वीकार नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 26 सितंबर को ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह ऐसा समझौता चाहते हैं जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोला जाए। ट्रंप ने ईरान की ओर से रखी गई शर्तों को स्वीकार करने से इनकार किया।

अमेरिका की ओर से संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने भी प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, ईरान वास्तविक बातचीत शुरू होने से पहले ही प्रतिबंधों में राहत, सैन्य नाकेबंदी हटाने और फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों तक पहुंच जैसी रियायतें मांग रहा था। वॉल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन को भरोसा नहीं है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत में अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा।

ईरान बोला- आधिकारिक जवाब का इंतजार

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक तौर पर प्रस्ताव खारिज किए जाने के बावजूद अराघची ने कहा कि ईरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान कूटनीति के लिए तैयार है और अब बातचीत का रास्ता खुला हुआ है।

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी संकेत दिया है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के दायरे में इन मुद्दों पर सहमति बनाई जा सकती है।

परमाणु मुद्दा बना सबसे बड़ा सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का एक प्रमुख केंद्र ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। वॉशिंगटन चाहता है कि किसी भी नए समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस आश्वासन शामिल हों। दूसरी ओर, तेहरान का कहना है कि बातचीत मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों के दायरे में हो सकती है।

ईरान ने पहले भी कहा है कि वह सैन्य टकराव की स्थिति के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही कूटनीति का विकल्प खुला रखना चाहता है। अराघची ने भी कहा है कि यदि संघर्ष दोबारा शुरू होता है तो ईरान उसके लिए तैयार है, लेकिन बातचीत के रास्ते को बंद नहीं किया गया है।

होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। इसलिए इस मार्ग को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, शिपिंग और क्षेत्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

हालांकि ट्रंप ने मौजूदा सात दिवसीय प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन की ओर से आगे बातचीत की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह आगे बातचीत हो सकती है।

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