छत्तीसगढ़

उर्स-ए-चांद शाह वली में गूंजे सूफियाना कलाम, अमन-चैन की मांगी गई दुआ

कव्वालियों से गूंजा आस्ताना

रायपुर, 9 मई 2026। राजधानी रायपुर में हज़रत सैयद चांद शाह वली रहमतुल्लाह अलैह तीन मजार का सालाना उर्स पाक इन दिनों अकीदत और श्रद्धा के माहौल में धूमधाम से मनाया जा रहा है। उर्स की शुरुआत शाही चादर और संदल जुलूस के साथ हुई, जो शहर के विभिन्न इलाकों का गश्त करते हुए आस्ताने पहुंचा। यहां चादरपोशी की रस्म अदा की गई और देश-प्रदेश में अमन, खुशहाली और तरक्की की दुआ मांगी गई।

उर्स के मौके पर आयोजित तकरीर में मौलाना तौकीर जिया जामई ने कहा कि जहां खुदा की हम्द और सना होती है, वहां रहमत और फरिश्तों का नूर बरसता है। उन्होंने लोगों से नेक अमल और इंसानियत के रास्ते पर चलने की अपील की। वहीं शहर काजी मौलाना कारी इमरान ने कहा कि इंसान को जिंदगी में सब्र, अच्छे अखलाक और गुनाहों से बचने की सीख अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और गुरु का सानिध्य इंसान को बेहतर रास्ता दिखाता है।

असलम रायपुरी की कव्वाली ने बांधा समा
उर्स के दौरान अब्बास कादरी ग्रुप ने शानदार नात पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। वहीं शहर के उभरते युवा कव्वाल असलम रायपुरी ने अपनी सूफियाना कव्वालियों से देर रात तक समां बांधे रखा। “जब पुकारो मेरे मौला को पुकारो”, “तेरे इश्क में भूल चुका हूं खुद को” और “मैं बलिहारी जाऊं चांद शाह बाबा के” जैसे कलामों पर जायरीन झूम उठे।

कुल शरीफ की फातिहा में इमाम साहब ने देश में शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की। उर्स में सभी धर्मों और समुदायों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी आस्था के फूल चढ़ा रहे हैं और मन्नतें मांग रहे हैं।

आस्ताने में जायरीनों के लिए लंगर और तबर्रुक का भी विशेष इंतजाम किया गया है। दरूद और कुरानखानी का सिलसिला लगातार जारी है। आयोजकों के अनुसार यह उर्स पाक कौमी एकता और भाईचारे की मिसाल बन चुका है, जहां हर मजहब के लोग एक साथ शामिल होकर अमन और मोहब्बत का संदेश दे रहे हैं।

रविवार तक चलने वाले इस उर्स में दस्तारबंदी समेत कई धार्मिक रस्में भी अदा की जाएंगी।

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