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जेल में बंद शिक्षक की ट्रेनिंग में ड्यूटी! आदेश के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप

छिंदवाड़ा, 18 जुलाई 2026। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय ने सिकल सेल प्रशिक्षण के लिए जारी आदेश में ऐसे शिक्षक की भी ड्यूटी लगा दी, जो पिछले दो वर्षों से 43 लाख रुपये के चर्चित वित्तीय अनियमितता मामले में जेल में बंद है। आदेश सामने आते ही शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

प्रशिक्षण सूची में जेल में बंद शिक्षक का नाम

जानकारी के अनुसार, बीईओ कार्यालय ने संकुल लहगड़ुआ में आयोजित सिकल सेल प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों की सूची जारी की। सूची में चौथे क्रम पर उस शिक्षक का नाम शामिल है, जो वित्तीय अनियमितता के मामले में पिछले दो वर्षों से जेल में बंद है। आदेश पर बीईओ के हस्ताक्षर भी हैं और सभी शिक्षकों को निर्धारित समय पर प्रशिक्षण में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

इस घटना के बाद शिक्षक और कर्मचारी हैरान हैं कि आखिर जेल में बंद कर्मचारी का नाम प्रशिक्षण सूची में कैसे शामिल हो गया और बिना सत्यापन के आदेश जारी कैसे कर दिया गया।

पहले भी विवादों में रहा संदीपनी विद्यालय

गौरतलब है कि तामिया का संदीपनी विद्यालय हाल ही में एक दिन की अवधि के लिए प्राचार्य पद का विज्ञापन जारी होने के कारण भी चर्चा में रहा था। अब इस नए मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

43 लाख रुपये के घोटाले में जेल में है आरोपी

बताया गया कि तामिया विकासखंड में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत 43 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। कोषालय जांच में सरकारी राशि निजी खातों में ट्रांसफर किए जाने का खुलासा हुआ था।

तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर एक अधिकारी, एक सेवानिवृत्त कर्मचारी, दो बाबू सहित छह आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले के मुख्य आरोपी हरिप्रसाद पंद्रे को निलंबित कर दिया गया था और वह वर्तमान में जेल में बंद है। आरोपियों से 43 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई भी की गई थी।

बीईओ ने दी सफाई

मामले में बीईओ बी.के. सानेर ने सफाई देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के लिए जारी सूची उनके कार्यालय ने तैयार नहीं की थी, बल्कि यह सिकल सेल विभाग की ओर से भेजी गई थी। उन्होंने कहा कि सूची की जांच कराई जा रही है और यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे तत्काल सुधारा जाएगा।

हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि बिना सत्यापन के सूची पर हस्ताक्षर कर आदेश कैसे जारी कर दिया गया। इस घटना के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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