उपाध्याय महेंद्र सागरजी बनेंगे आचार्य, बाड़मेर के चादर महोत्सव में मिलेगी पदवी

रायपुर, 13 अक्टूबर 2025। राजधानी रायपुर के न्यू राजेन्द्र नगर में चातुर्मास कर रहे खरतरगच्छ के उपाध्याय पद पर विराजमान आध्यात्म योगी महेंद्र सागर महाराज साहब को आचार्य पदवी से विभूषित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक घोषणा आचार्य जिनमणिप्रभ सूरीश्वर महाराज ने बाड़मेर में आयोजित महा मांगलिक कार्यक्रम के दौरान की। जैसलमेर में होने वाले चादर महोत्सव के दौरान “आचार्य पदवी” प्रदान की जाएगी। इस घोषणा से पूरे भारत के खरतरगच्छ संघ में हर्ष की लहर दौड़ गई है। जैन समुदाय के श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को बधाईयां दीं।
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक समाज एवं चातुर्मास समिति, विवेकानंद नगर के अध्यक्ष श्यामसुंदर बैदमुथा ने कहा कि उपाध्याय भगवंत आध्यात्म योगी महेंद्र सागरजी महाराज साहब को आचार्य पदवी की घोषणा से सर्वत्र हर्ष की लहर है।
प्रचार प्रमुख चंद्रप्रकाश ललवानी ने बताया कि दादा गुरुदेव के चादर महोत्सव का आयोजन जैसलमेर में अगले वर्ष 6 से 8 मार्च तक किया जाएगा। महोत्सव में उपाध्याय भगवंत महेंद्र सागरजी महाराज साहब को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा। जैन धर्म में संतों की चार पदवी होती है। दीक्षा के बाद साधु बनते हैं। फिर गणि, इसके बाद उपाध्याय और आखिर में आचार्य का सर्वोच्च पद प्राप्त होता है। रायपुर में चातुर्मास के समापन के बाद उपाध्याय भगवंत महेंद्र सागर महाराज साहब ससंघ जैसलमेर की ओर विहार करेंगे।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के बदनावर में 15 जून 1946 में उपाध्याय भगवंत का जन्म हुआ। मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरर बने। 1981 में इंदौर में आयोजित चातुर्मास में साध्वी मणिप्रभाजी के प्रवचन के लिए धर्मपत्नी को छोड़ने जाते थे। एक दिन पत्नी के कहने पर प्रवचन सुनने बैठे। मन में धर्म ऐसा रमा की दीक्षा का फैसला लिया। जिम्मेदारियां व कारोबार को समेटकर 5 जनवरी 2001 में अमरावती में दादा गुरुदेव की प्रतिमा के समक्ष खुद ही पुत्र समेत दीक्षा ली। भद्रावती जैन तीर्थ में बड़ी दीक्षा हुई। आचार्य जिन पीयूष सागर महाराज के प्रशिष्य बने। दिसंबर 2022 में जयपुर के मोहनबाड़ी जैन मंदिर में उपाध्याय पद से विभूषित हुए। अब तक 24 से अधिक शिष्यों को दीक्षा देकर संयम पथ पर अग्रसर कर चुके हैं।



