अंतराष्ट्रीय

अमेरिका और वेनेजुएला आमने-सामने! लैटिन अमेरिका में जंग के हालात…

रूसी हथियारों से लैस मादुरो बोले: “हिमाकत की तो जवाब मिलेगा”

वाशिंगटन, 27 अक्टूबर 2025। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव तेजी से बढ़ता जा रहा है। बीते कुछ दिनों में जो हलचल दिखी है, उसने पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में जंग के बादल मंडरा दिए हैं। अमेरिका ने वेनेजुएला की सीमाओं के पास करीब 10 हजार सैनिक, एयरक्राफ्ट कैरियर, परमाणु पनडुब्बियां और युद्धपोतों की तैनाती बढ़ा दी है। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि वॉशिंगटन वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के मूड में है।

लेकिन इसके बावजूद भी वेनेजुएला झुकने को तैयार नहीं है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर किसी ने हमारे देश की तरफ आँख उठाई, तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।

रूस-चीन के सपोर्ट से मजबूत हुआ मादुरो
वेनेजुएला के रूसी हथियारों से लैस होने के बाद अमेरिका की चिंताएं बढ़ गई हैं। मादुरो ने दावा किया है कि उनकी सेना के पास रूस निर्मित 5,000 से अधिक Igla-S पोर्टेबल मिसाइलें हैं, वही हथियार जिनका इस्तेमाल भारत भी करता है। इन मिसाइलों की खासियत यह है कि इन्हें सैनिक कंधे से दाग सकते हैं, और ये कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को मार गिराने में सक्षम हैं।

उधर, चीन भी अब वेनेजुएला के साथ खुलकर सामने आया है। बीजिंग ने लैटिन अमेरिका में अमेरिकी सैन्य तैनाती की निंदा करते हुए इसे “क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा” बताया है।

“तेल और सत्ता” की जंग
मादुरो को सत्ता से हटाने की कोशिश में अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर कठोर आर्थिक प्रतिबंध (Sanctions) लगा रखे हैं। परिणामस्वरूप देश में आर्थिक अस्थिरता और गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए हैं। अमेरिकी “डीप स्टेट” ने अब लोकतंत्र का मुद्दा उठाकर मादुरो विरोधी मरिया कोरीना मचाडो को आगे किया है, जो लंबे समय से मादुरो के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं।

मचाडो को हाल ही में शांति का नोबेल पुरस्कार भी दिलवाया गया है, जिसे कई विशेषज्ञ अमेरिका की “राजनीतिक रणनीति” मान रहे हैं। उन्होंने खुलकर कहा है: “अगर मैं सत्ता में आई, तो अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला में तेल व्यापार के लिए आमंत्रित करूंगी।”

पीएम मोदी को दिया न्योता
जंग और राजनीतिक संकट के बीच, मरिया कोरीना मचाडो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बयान देते हुए कहा है: “मैं आज़ाद वेनेजुएला में प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी करने के लिए तैयार हूँ। भारत हमारे लिए लोकतंत्र और विकास का प्रतीक है।”

उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में “राजनयिक संकेत” के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि मचाडो भारत के साथ संबंध सुधारने का संदेश देकर अमेरिका समर्थक लोकतांत्रिक मोर्चे को मजबूती देना चाहती हैं।

क्या फिर शुरू होगी लैटिन अमेरिका में “ठंडी जंग”?
विश्लेषकों के मुताबिक, यह स्थिति अब सिर्फ अमेरिका और वेनेजुएला तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह रूस-चीन बनाम अमेरिका के नए भू-राजनीतिक संघर्ष का मैदान बन चुकी है। रूसी मिसाइलें, चीनी समर्थन और अमेरिकी सैन्य तैनाती, तीनों मिलकर लैटिन अमेरिका को नए शीत युद्ध (Cold War) की ओर धकेल रहे हैं।

अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका वाकई हमला करेगा, या फिर यह “सैन्य दबाव की रणनीति” मात्र है? फिलहाल इतना तय है — दुनिया एक बार फिर तेल, ताकत और तख्त की जंग देखने जा रही है।

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