बीजापुर में ‘शिक्षा माफिया’ बेलगाम: मद्देड-कुटरू के अवैध स्कूलों पर विभाग मौन, जांच सिर्फ कागज़ों में

बीजापुर, 27 अक्टूबर 2025। कहते हैं शिक्षा समाज की रीढ़ होती है, लेकिन बीजापुर जिले के मद्देड और कुटरू ब्लॉक में यह रीढ़ अब चरमराने लगी है। यहां दर्जनों निजी स्कूल बिना किसी मान्यता या अनुमति के खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जबकि शिक्षा विभाग महीनों से इस पर चुप्पी साधे बैठा है। जांच की बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलों की खानापूर्ति। सवाल यह उठता है — क्या विभाग खुद इन अवैध स्कूलों का संरक्षक बन चुका है?
विभाग का घिसा-पिटा जवाब: “जांच जारी है”
हर बार जब यह मुद्दा मीडिया या जनप्रतिनिधियों के सामने उठता है, तो जिला शिक्षा विभाग का जवाब तय रहता है — “जांच जारी है, रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी।”
लेकिन यह जांच कब शुरू हुई, कब पूरी होगी, और आखिर किस पर कार्रवाई होगी — इसका जवाब आज तक किसी के पास नहीं। उधर, जिन स्कूलों को मान्यता नवीनीकरण के लिए नोटिस भेजे जाते हैं, उन्हीं के बगल में बिना पंजीयन वाले स्कूल वर्षों से बच्चों से फीस वसूल रहे हैं।
दो DEO, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं
बीजापुर जिले में दो जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त हैं, पर जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नहीं। नतीजा — फाइलें एक मेज से दूसरी मेज तक घूमती रहती हैं और कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि समन्वय की कमी और आपसी मतभेद के कारण पूरे जिले में निगरानी तंत्र पंगु हो चुका है।
‘शिक्षा’ नहीं, ‘व्यवसाय’ बन चुके हैं स्कूल
मद्देड और कुटरू क्षेत्र के कई स्कूल ऐसे हैं जिनके पास न तो भवन स्वीकृति है, न प्रशिक्षित शिक्षक। कुछ स्कूल तो विभागीय निरीक्षण से बचने के लिए दूसरे स्कूलों के कोड का उपयोग कर रहे हैं — यानी जिन संस्थानों को मान्यता मिली है, उनके नाम पर परीक्षा फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। इन स्कूलों में शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर अधूरा, विद्यार्थियों का रिकॉर्ड गायब और फीस वसूली बेहिसाब है। शिक्षा के नाम पर अब “कमाई का कारोबार” धड़ल्ले से चल रहा है।
अधिकारियों की जांच सिर्फ फोटोशूट : अभिभावक
एक अभिभावक ने कहा कि हमें बाद में पता चला कि हमारे बच्चों का स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं है। अधिकारी आते हैं, फोटो खींचते हैं और चले जाते हैं। उसके बाद कुछ नहीं होता।
भोपालपटनम के एक स्थानीय नेता ने आरोप लगाया कि कई स्कूल बच्चों के नाम किसी और स्कूल में जोड़कर परीक्षा दिलवाते हैं। यह सीधा शिक्षा अधिनियम का उल्लंघन है।
जनप्रतिनिधियों की आवाज़ भी नाकाम
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा विभाग की निष्क्रियता ने बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार बच्चों की पढ़ाई पर करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन विभाग की उदासीनता से जमीनी असर शून्य है।
फाइलों में दबी सच्चाई
शिक्षा विभाग के दफ्तर में इन अवैध स्कूलों की शिकायतों से जुड़ी फाइलें महीनों से लंबित हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ प्रभावशाली स्कूल संचालकों के विभागीय अधिकारियों से करीबी संबंध हैं, जिसके चलते जांच रिपोर्ट जानबूझकर रोकी जा रही है।
कब जागेगा शिक्षा विभाग?
अब यह सिर्फ कुछ स्कूलों को बंद करने का मामला नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की साख पर सवाल है। जरूरत है कि मद्देड और कुटरू क्षेत्र में सभी निजी स्कूलों का भौतिक सत्यापन कर बिना मान्यता वाले स्कूलों को तुरंत बंद किया जाए और संचालकों पर एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही, वर्षों से जांच लटकाने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो — तभी बीजापुर के बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।



