छत्तीसगढ़

गंज मंडी में फल-फूल रहा अवैध शराब कारोबार, किसकी है मेहरबानी?

शुष्क दिवस पर भी बिक्री, विरोध करने पर मारपीट, 10 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं

रायपुर, 23 दिसंबर 2025। राजधानी के व्यस्ततम इलाके गंज मंडी में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग की कथित उदासीनता या संरक्षण के चलते शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि गुरु घासीदास जयंती जैसे शुष्क दिवस पर भी शराब बेची गई। शिकायतकर्ताओं ने वीडियो सबूत सौंपे, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

विरोध करने पर मारपीट
मामले की गंभीरता तब बढ़ गई जब अवैध शराब बिक्री का विरोध करने पर स्थानीय नागरिकों के साथ मारपीट की गई। गंज क्षेत्र के निवासी और कारोबारी समीर खान ने बताया कि 13 दिसंबर को वह अपने सुपरवाइजर जितेंद्र श्रीवास्तव के साथ दुकान किराए के सिलसिले में गंज मंडी पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी दुकान के पास दीपक मुदलियार और मनोज मानिकपुरी के गुर्गे अवैध रूप से शराब बेच रहे थे।

सुपरवाइजर जितेंद्र ने जब दुकान से दूर जाकर शराब बेचने को कहा, तो विवाद हो गया। कुछ ही देर में दीपक मुदलियार, मनोज मानिकपुरी, राजेंद्र नाग, जामिल, त्रिपाल, दीपमाला सहित 8–10 अन्य लोग मौके पर पहुंचे और जितेंद्र के साथ मारपीट शुरू कर दी। बीच-बचाव करने आए समीर खान के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

10 दिन बाद भी कोई सख्त कदम नहीं
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के तुरंत बाद गंज थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद 10 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे आरोपी बेखौफ होकर इलाके में घूम रहे हैं और अवैध कारोबार जारी है।

सुबह 4 बजे से देर रात तक बिक्री
स्थानीय सूत्रों के अनुसार गंज मंडी में सुबह 4 बजे से ही ‘शोले’ ब्रांड की अवैध शराब की बिक्री शुरू हो जाती है, जो देर रात तक चलती है। हाल ही में पुलिस द्वारा 70 क्वार्टर शराब जब्त करने का दावा किया गया, लेकिन यह शराब किससे जब्त की गई और आरोपी कौन है, इस पर जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है।

इलाके के रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध शराब कारोबार पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और मारपीट के आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए, ताकि गंज मंडी में कानून व्यवस्था बहाल हो सके।

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