गेवरा खदान में कोल लिफ्टिंग को लेकर विवाद, ठेका कर्मियों में हिंसक झड़प

कोरबा, 5 जनवरी 2026 (वीएनएस)। एसईसीएल की गेवरा परियोजना में एक बार फिर कोयला लिफ्टिंग को लेकर वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई। बीती रात दो निजी कंपनियों के ठेका कर्मियों के बीच जमकर मारपीट हुई। यह घटना दीपका थाना क्षेत्र की है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, कोयला लिफ्टिंग के विवाद में केके इंटरप्राइजेज के कर्मियों ने केसीपीएल कंपनी के कर्मचारियों पर हमला कर दिया। पहले दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते लाठी-डंडों से मारपीट में बदल गई। हैरान करने वाली बात यह रही कि पूरी घटना वहां तैनात सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में हुई, लेकिन वे मारपीट रोकने में नाकाम नजर आए।
इस हमले में केसीपीएल के कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका इलाज जारी है। पीड़ित पक्ष ने दीपका थाना में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
खदान परिसर में दहशत का माहौल
गेवरा खदान में हुई इस घटना से अन्य कामगारों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यह घटना पाली क्षेत्र में पिछले वर्ष हुए उस खूनी संघर्ष की याद दिलाती है, जिसमें एक ट्रांसपोर्टर की जान चली गई थी। लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र में बड़ी हिंसक वारदात या गैंगवार से इनकार नहीं किया जा सकता।
बताया जा रहा है कि गेवरा परियोजना में लंबे समय से केके इंटरप्राइजेज का दबदबा रहा है। आरोप है कि इसी वर्चस्व को बनाए रखने के लिए केसीपीएल के कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। इस आपसी टकराव का असर खदान के सामान्य कामकाज पर भी पड़ रहा है। एसईसीएल के अधिकारी और कर्मचारी भी निजी कंपनियों के बीच चल रहे विवाद से खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
पुलिस-प्रशासन का खौफ नहीं?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कोल लिफ्टिंग से जुड़े कुछ लोगों को सत्ता के गलियारों और प्रभावशाली अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद हमलावर बेखौफ नजर आए। खदान परिसर के भीतर खुलेआम मारपीट और कानून को हाथ में लेना पुलिस-प्रशासन की सख्ती पर सवाल खड़े करता है।
दीपका पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर मामला भी पहले की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा। गेवरा परियोजना में बढ़ती गुंडागर्दी पुलिस प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।



