छत्तीसगढ़

कक्षा चौथी के प्रश्न पत्र विवाद पर DEO को कारण बताओ नोटिस

रायपुर, 9 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा के अंग्रेजी प्रश्न पत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपों के बीच लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है।

परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न में “मोना के कुत्ते का नाम क्या है?” पूछा गया था, जिसके विकल्पों में “शेरू” के साथ “राम” नाम भी शामिल था। इस प्रश्न के सामने आने के बाद अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि हिंदू धर्म के आराध्य भगवान राम का नाम इस तरह के संदर्भ में शामिल करना अत्यंत आपत्तिजनक है और इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जिले की प्राथमिक शालाओं की अर्धवार्षिक परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों का निर्धारण, मुद्रण और वितरण की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की होती है। इसके बावजूद प्रश्न पत्र निर्माण में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे यह आपत्तिजनक प्रश्न परीक्षा में शामिल हो गया। विभाग का मानना है कि इस घटना से शासन और शिक्षा विभाग की छवि प्रभावित हुई है।

नोटिस में इसे पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही और उदासीनता बताया गया है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के विरुद्ध है। इसी आधार पर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्यों न उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

लोक शिक्षण संचालनालय ने विजय कुमार लहरे को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपना लिखित प्रतिवाद तत्काल, आज ही अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष प्रस्तुत करें। नोटिस में यह भी कहा गया है कि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रकरण के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रश्न पत्र निर्माण और समीक्षा प्रक्रिया की विस्तृत जांच भी की जा सकती है। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता नियंत्रण और संवेदनशीलता की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।

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