छत्तीसगढ़

अपनों के नाम पत्र: विलुप्त होती परंपरा को पुनर्जीवित करने शकुंतला फाउंडेशन का आयोजन

रायपुर, 18 फरवरी 2026। डिजिटल युग में विलुप्त होती पत्र लेखन परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से शकुंतला फाउंडेशन द्वारा “अपनों के नाम पत्र” शीर्षक से एक अभिनव एवं भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन बापू की कुटिया, कलेक्ट्रेट परिसर में किया गया। वरिष्ठजनों के हितार्थ आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुजुर्गों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और अपने प्रियजनों के नाम हस्तलिखित पत्र लिखकर भावनाओं को अभिव्यक्त किया।

फाउंडेशन की अध्यक्ष स्मिता सिंह ने बताया कि आज भावनाओं की अभिव्यक्ति मोबाइल संदेशों और सोशल मीडिया तक सीमित होती जा रही है, जबकि हस्तलिखित पत्र आत्मीयता, संस्कार और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज होते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन नई पीढ़ी को पत्र लेखन की गरिमा और महत्व से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

इस अवसर पर प्रख्यात मानवविज्ञानी, साहित्यकार एवं छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ. रूपेन्द्र कवि ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने अपना जन्मोत्सव वरिष्ठजनों के स्नेहिल आशीर्वाद के साथ मनाया और कार्यक्रम की संकल्पना की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने बुजुर्गों के अनुभव को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए फाउंडेशन की संस्थापक श्रद्धेय शकुंतला देवी के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही “अपनों के नाम पत्र” को भविष्य में पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने का सुझाव देते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया, ताकि वरिष्ठजनों की भावनाएं और जीवनानुभव स्थायी रूप से संरक्षित किए जा सकें।

इस अवसर पर मोनिका कवि ने उपस्थित सभी वरिष्ठजनों को फल एवं नाश्ते का वितरण कर धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में शकुंतला देवी, माधुरी शुक्ला, महेश दुबे, सुषमा बग्गा, पदमा घोष, सुधा दीक्षित, स्मिता सिंह, मोनिका कवि, साहू सर एवं अमिता अग्रवाल सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।

यह आयोजन वरिष्ठजनों के सम्मान, संवाद और संवेदना को समर्पित एक भावनात्मक पर्व के रूप में संपन्न हुआ, जिसने पत्र लेखन की परंपरा को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की।

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