भारत-जर्मनी रक्षा सहयोग को बढ़ावा, राजनाथ सिंह का सह-निर्माण पर जोर

नई दिल्ली, 22 अप्रैल 2026। भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा संदेश दिया है। जर्मनी की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी और सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास और निर्माण पर जोर दिया।
म्यूनिख से बर्लिन पहुंचने के बाद जर्मन सांसदों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का “आत्मनिर्भर भारत” अभियान वैश्विक साझेदारों के लिए सह-निर्माण, सह-विकास और सह-नवाचार का खुला निमंत्रण है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में नई तकनीकों और रणनीतिक सहयोग की अहम भूमिका है।
सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आधुनिक हो रहा है और जर्मनी के औद्योगिक अनुभव के साथ साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। उन्होंने जर्मनी के ‘मिटेलस्टैंड’ यानी लघु एवं मध्यम उद्योगों की नवाचार क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भारत के स्टार्टअप और निजी कंपनियां भी रक्षा क्षेत्र में तेजी से उभर रही हैं।
बैठक के दौरान जर्मनी के सांसद और संसदीय समिति के अध्यक्ष थॉमस रोवेकैंप ने सिंह का स्वागत किया और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। सिंह ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी अहम बताया।
रक्षा मंत्री ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज के संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डालते हैं। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अस्थिरता को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बताया।
अपनी यात्रा के दौरान सिंह ने बर्लिन स्थित हम्बोल्ट विश्वविद्यालय में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। बर्लिन पहुंचने पर उनका सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया।
इस दौरे को भारत-जर्मनी रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देने और वैश्विक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



