छत्तीसगढ़

सदन में गूंजा बाघों के शिकार का मामला, नेता प्रतिपक्ष ने वन मंत्री को घेरा

रायपुर, 15 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार का मामला सदन में जोरदार ढंग से गूंजा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लगातार हो रहे बाघों के शिकार को गंभीर लापरवाही बताया। विधायक शेषराज हरवंश, विक्रम मंडावी और लखेश्वर बघेल ने भी सरकार को घेरा। जवाब में वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और प्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

आईबी जवान का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं?

डॉ. चरणदास महंत ने पूछा कि बाघों के शिकार मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल (आईबी) से जुड़े जवान का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं न कहीं कोई राजनीतिक संरक्षण या सिंडिकेट काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की चेतावनी के बावजूद विभाग सतर्क नहीं हुआ और पिछले 30 महीनों में छह बाघों की मौत हुई है।

महंत ने कहा कि प्रदेश में बाघों की तस्करी हो रही है और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

वन मंत्री बोले- किसी को बचाया नहीं जा रहा

वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी आरोपी को बचाने या उसका नाम छिपाने का प्रयास नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 126 कैमरे लगाए गए हैं और सभी सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है।

इंद्रावती में कितने बाघ?

कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या और वार्षिक बजट की जानकारी मांगी। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार रिजर्व में पांच बाघों की पुष्टि हुई थी। उन्होंने कहा कि अब तक छह बाघों की खाल बरामद हुई हैं, लेकिन यह वैज्ञानिक रूप से अभी पुष्टि नहीं हुई है कि सभी खालें इंद्रावती के ही बाघों की हैं। उन्होंने बताया कि टाइगर रिजर्व के संरक्षण पर प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।

आईबी सिपाही और मुखबिर गिरफ्तार

वन मंत्री ने सदन को बताया कि 29 जून 2026 को मिली सूचना के आधार पर कांकेर जिले में संयुक्त अभियान चलाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल का सिपाही बियेश्वर गेड़ाम और गोपनीय मुखबिर बाबूराव मडावी शामिल हैं। दोनों के कब्जे से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और अन्य सामग्री बरामद हुई। महाराष्ट्र पुलिस ने सिपाही को निलंबित कर दिया है, जबकि मुखबिर को सेवा से हटा दिया गया है।

14 आरोपी पहले, फिर सात और गिरफ्तार

मंत्री ने बताया कि मार्च 2026 में दर्ज एक अन्य मामले में पहले ही 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। वहीं हालिया जांच के दौरान सात और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। तलाशी अभियान में बाघ की एक और खाल, 12 नाखून, चार कैनाइन दांत और शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी बरामद किए गए हैं। डीएनए जांच के लिए सभी नमूने भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजे गए हैं।

तीन वन अधिकारी निलंबित

वन मंत्री ने बताया कि मामले में लापरवाही पाए जाने पर परिक्षेत्र अधिकारी कमल सिंह कश्यप, उपवनक्षेत्रपाल नरहरी सिंह बघेल और वनरक्षक विश्वनाथ मांझी को निलंबित कर दिया गया है।

41 आरोपी गिरफ्तार, सरकार ने गिनाई कार्रवाई

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार बनने के बाद बाघों के अवैध शिकार और तस्करी से जुड़े कुल पांच मामलों में छह बाघों की खाल जब्त की गई है। इन मामलों में अब तक 41 आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी का गठन किया गया है और वन्यजीव अपराधों पर निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है।

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