राजधानी के दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव की धूम
मुनि आगम सागर की देशना से श्रद्धा का वातावरण

रायपुर, 29 जुलाई 2026। राजधानी रायपुर के मालवीय रोड स्थित दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुधवार को गुरु पूर्णिमा महापर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। नवोदय तीर्थ वर्षायोग 2026 समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मुनि आगम सागर महाराज के सानिध्य में अभिषेक, शांतिधारा, आचार्य पूजन और दिव्य प्रवचन का आयोजन हुआ।
समिति के कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत मूलनायक भगवान आदिनाथ स्वामी के भव्य मस्तकाभिषेक से हुई। प्रथम अभिषेक का सौभाग्य बंशीलाल जैन (भोरावत) परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद सर्वजन सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना के साथ चमत्कारिक शांतिधारा का पावन वाचन किया गया, जिसमें अखिल जैन (मोनू) परिवार ने शांतिधारा का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
इसके पश्चात टैगोर नगर के पारस बाबा भक्त परिवार द्वारा आचार्य श्री की संगीतमय पूजन का आयोजन किया गया। अष्ट द्रव्यों से सुसज्जित थालों के साथ श्रद्धालुओं ने नृत्य-भक्ति करते हुए आचार्य श्री के चरणों में अर्घ्य समर्पित किए। इस दौरान पूरा जिनालय “आचार्य विद्यासागर महाराज की जय” के जयघोष से गूंज उठा।
मुनि आगम सागर ने बताया गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि आगम सागर महाराज ने गुरु पूर्णिमा के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर स्वामी को केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद 65 दिनों तक उनकी दिव्यध्वनि इसलिए प्रकट नहीं हुई क्योंकि उस समय कोई योग्य शिष्य उपस्थित नहीं था जो उनके उपदेश को ग्रहण कर सके। बाद में इंद्रभूति ब्राह्मण के समवसरण में पहुंचकर दिगंबर दीक्षा ग्रहण करने और प्रथम गणधर बनने के साथ गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत हुई, जिससे गुरु पूर्णिमा पर्व का महत्व स्थापित हुआ।
मुनिश्री ने गुरु कृपा की महिमा बताते हुए कहा कि गुरु का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि गुरु अपने शिष्य के धैर्य, विश्वास और समर्पण की परीक्षा लेकर उसे आत्मकल्याण और लोककल्याण का मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु पर सच्चा विश्वास रखने वाला व्यक्ति जीवन की हर कठिनाई पर विजय प्राप्त कर सकता है। मुनिश्री ने समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज और वर्तमानाचार्य श्री 108 समय सागर महाराज का स्मरण करते हुए गुरु परंपरा के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में नवोदय तीर्थ वर्षायोग समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज ने श्रद्धालुओं से आगामी चातुर्मास एवं धार्मिक आयोजनों में सहपरिवार शामिल होकर धर्म लाभ और गुरु भक्ति का पुण्य अर्जित करने की अपील की।



