रायपुर में कल होगा ऐतिहासिक चातुर्मास कलश स्थापना समारोह
150 साल पुराने जैन मंदिर को मिलेगा 'लघु तीर्थ' का स्वरूप

रायपुर, 1 अगस्त 2026। राजधानी रायपुर में दिगंबर जैन समाज के लिए 2 अगस्त का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है। मालवीय रोड स्थित श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में नवोदय तीर्थ 2026 वर्षायोग (चातुर्मास) की भव्य कलश स्थापना दोपहर 1 बजे होगी। इस अवसर पर मुनि आगम सागर महाराज, पुनीत सागर महाराज, धैर्य सागर महाराज एवं स्वागत सागर महाराज के सानिध्य में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
यह चातुर्मास इस सदी के महान संत आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा और वर्तमानाचार्य समयसागर महाराज की परंपरा से जुड़ा विशेष आयोजन माना जा रहा है। सकल दिगंबर जैन समाज में इसे लेकर उत्साह का माहौल है।
150 वर्ष पुराने मंदिर का होगा कायाकल्प
नवोदय तीर्थ वर्षायोग समिति-2026 के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरुकृपा और कार्यकारी अध्यक्ष संजय जैन नायक ने बताया कि लगभग 150 वर्ष पुराने अतिशयकारी जैन मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसे ‘लघु तीर्थ’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस निर्माण का अंतिम आशीर्वाद समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज ने अपने रायपुर प्रवास के दौरान दिया था।
भव्य निर्माण की रूपरेखा
समिति के अनुसार प्रस्तावित ‘लघु तीर्थ’ में कई धार्मिक एवं आधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं—
- तीन मंजिला ऊंचे शिखर वाला भव्य जिनालय
- त्रिकाल चौबीसी एवं सहस्रकूट जिनालय
- संत निवास
- सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला
- पार्किंग एवं सुंदर उद्यान
अखंड ज्योति बनी आस्था का केंद्र
समिति ने बताया कि आचार्य विद्यासागर महाराज की आज्ञा के अनुसार 25 जनवरी 2024 को मूलनायक आदिनाथ भगवान की वेदी के समक्ष अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित की गई थी। यह ज्योति नवीन जिनालय निर्माण पूर्ण होने तक निरंतर जलती रहेगी और वर्तमान में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में स्थापित है।
समाज से सहयोग का आह्वान
कार्यकारी अध्यक्ष संजय जैन नायक ने सकल दिगंबर जैन समाज, विभिन्न मंदिर समितियों और समाज के सभी धर्मप्रेमियों से ‘लघु तीर्थ’ निर्माण के महासंकल्प में सहभागी बनने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के इस स्वप्न को साकार करना पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।
समाज का मानना है कि मुनि आगम सागर महाराज ससंघ का रायपुर में चातुर्मास करना इस महायोजना के लिए अत्यंत शुभ संकेत है और इससे धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।



