SIR के चलते अधिकारियों-कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
बिना अनुमति अवकाश पर जाने पर होगी कार्रवाई

रायपुर, 13 नवंबर 2025। छत्तीसगढ़ में निर्वाचक नामावलियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस अभियान के दौरान जिन शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, उनकी सभी छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी आयोग की अनुमति के बिना अवकाश पर नहीं जा सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पुनरीक्षण कार्यक्रम की समयसीमा तय
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, निर्वाचक नामावलियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य 28 अक्टूबर 2025 से प्रारंभ होकर 7 फरवरी 2026 तक चलेगा। इस अवधि में मतदाता सूची से जुड़ी नाम जोड़ने, हटाने, सुधार और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया की जाएगी। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 7 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
अधिकारी अब रहेंगे निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13सीसी के तहत SIR कार्य में नियोजित सभी अधिकारी और कर्मचारी अब निर्वाचन आयोग के प्रत्यक्ष नियंत्रण, अधीक्षण और अनुशासन के अधीन माने जाएंगे। मतलब यह कि पुनरीक्षण कार्य पूरा होने तक वे अपने विभाग की नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग की प्रशासनिक जिम्मेदारी में रहेंगे।
अवकाश स्वीकृति पर कड़ा प्रतिबंध
आयोग ने निर्देश दिया है कि SIR कार्य में लगे किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का अवकाश केवल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी छत्तीसगढ़ की अनुमति से ही स्वीकृत किया जा सकेगा। कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी अपने स्तर पर अवकाश नहीं दे पाएंगे।
आयोग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण कार्य से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी पूर्ण समर्पण से कार्य करें। किसी भी परिस्थिति में कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
आयोग की चेतावनी
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी बिना अनुमति अवकाश पर जाता है या SIR कार्य में लापरवाही बरतता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उद्देश्य
इस विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिहीन, अद्यतन और पारदर्शी बनाना है। आयोग का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटे नहीं और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में न रहे — इसके लिए यह अभियान निर्णायक कदम साबित होगा।




