RI प्रमोशन घोटाला: बस्तर से सरगुजा तक कई ठिकानों पर ACB का छापा…

रायपुर, 19 नवंबर 2025। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रेवेन्यू इंस्पेक्टर (RI) प्रमोशन घोटाले में बुधवार तड़के बड़ी कार्रवाई हुई। ACB (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) ने बस्तर, धमतरी, रायपुर, बिलासपुर, कोरिया और सरगुजा तक फैले दर्जन से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। कार्रवाई राजस्व विभाग के अफसरों, कर्मचारियों और प्रश्नपत्र छापने से जुड़े प्रिंटर संचालकों पर केंद्रित रही।
सुबह करीब पांच बजे जब ACB टीम अफसरों के घर पहुंची तो कई लोग कॉल बेल बजते ही नींद से जागे। दरवाजा खोलते ही सामने अफसरों और पुलिस टीम की भीड़ देख आरोपी और परिजन घबरा गए। इसके बाद टीम ने घर की तलाशी शुरू की और दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए।
कैसे हुआ घोटाला
जांच में सामने आया है कि पटवारियों को रेवेन्यू इंस्पेक्टर बनाने की प्रक्रिया पहले से तय कर ली गई थी। इस सुनियोजित खेल में कई हैरान करने वाली अनियमितताएँ सामने आईं:
• चयन के लिए 10 लाख रुपये तक की रकम वसूली गई।
• परीक्षा से पहले ही पेपर लीक कर दिया गया था।
• जिन उम्मीदवारों ने भुगतान किया था, उन्हें एक स्थान पर बिठाकर पेपर हल कराया गया।
• कई परीक्षार्थियों को एक ही रोल नंबर जारी किया गया ताकि नकल आसान हो।
• प्रश्नपत्र में कई सवाल जानबूझकर आउट ऑफ कोर्स रखे गए ताकि बाकी अभ्यर्थी परीक्षा में सफल न हो सकें।
सबसे बड़ी अनियमितता OMR शीट पर मोबाइल नंबर लिखवाना थी। इससे परीक्षा की गोपनीयता भंग होती है और परीक्षा बाद उम्मीदवारों से संपर्क कर सौदेबाजी की जा सकती थी। देश में किसी भी मानक परीक्षा में ऐसी अनुमति नहीं होती।
जांच रिपोर्ट खुलासा करती है पूरा सिस्टम
शिकायतें बढ़ने पर सरकार ने आईएएस केडी कुंजाम की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई। समिति ने कई गंभीर गड़बड़ियों की पुष्टि की और परीक्षा दोबारा कराने की सिफारिश की।
जांच रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
परीक्षा अधिसूचना में न तो कुल पदों का उल्लेख था और न ही आरक्षण का ब्योरा।
पाठ्यक्रम में बदलाव बिना सूचना के किया गया, जबकि भुइयां सॉफ्टवेयर से 7 सवाल पूछे गए।
OMR शीट में मोबाइल नंबर भराने का निर्देश परीक्षा नियमों का उल्लंघन है।
कुछ उम्मीदवारों के रोल नंबर और चयन सूची में मैनुअल फेरबदल के संकेत मिले।
रिश्तेदारों को साथ बैठाने के लिए क्रमिक रोल नंबर जारी किए गए, जैसे दो सगे भाइयों को 241797 और 241798।
जांच रिपोर्ट ने यह भी उजागर किया कि पति, पत्नी, साली, भाई समेत 22 रिश्तेदारों को एक ही कमरे में बैठकर परीक्षा दिलाई गई। एक आईएएस अफसर का भतीजा भी सेवा अवधि पूरी न होने के बावजूद आरआई बन गया।
सरकार और ACB की सक्रियता
नई सरकार को शिकायतें मिलते ही जांच का आदेश दिया गया था। रिपोर्ट नवंबर 2024 में ही सरकार को सौंपी जा चुकी थी, जबकि विभाग ने जनवरी 2025 में इसे “जांच जारी” बताया। इससे राजस्व विभाग की भूमिका और संदिग्ध मानी जा रही है।
अब ACB के छापों के बाद जांच तेजी पकड़ चुकी है। कई अफसरों के खिलाफ सबूत मिलना शुरू हो गया है और आगे बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
इस कार्रवाई से क्या बदल सकता है
यह घोटाला न सिर्फ प्रमोशन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी चोट करता है। ACB की कार्रवाई से उम्मीद है कि पूरी श्रृंखला उजागर होगी और दोषी अफसरों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
ACB की टीमें आज भी दस्तावेज खंगाल रही हैं और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।



