राष्ट्रीय

असम में बड़ा हादसा: राजधानी एक्सप्रेस की टक्कर से 8 हाथियों की मौत

गुवाहाटी, 20 दिसंबर 2025। असम के होजाई जिले शनिवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। यहां सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस एक हाथियों के झुण्ड से टकरा गई। इस हादसे में 8 हाथियों की मौत हो गई। टक्कर के बाद ट्रेन के 5 कोच और ट्रेन का इंजन पटरी से उतर गया, हालांकि किसी यात्री के घायल होने की खबर नहीं है।

शनिवार तड़के हुआ हादसा
रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन के साथ यह हादसा तड़के करीब 2.17 बजे हुआ। नगांव के डिविजनल वन अधिकारी सुहास कदम ने बताया कि यह घटना होजाई जिले के चांगजुराई इलाके में हुई। कदम और अन्य वन अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रभावित जमुनामुख-कांपुर सेक्शन से गुजरने वाली ट्रेनों को दूसरी लाइन से डायवर्ट किया गया है। फिलहाल लाइन पर मरम्मत का काम चल रहा है। सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस मिजोरम के सैरांग (आइजोल के पास) को आनंद विहार टर्मिनल (दिल्ली) से जोड़ती है।

जानकारी के मुताबिक़, घटना गुवाहाटी से 126 किलोमीटर दूर होजई जिले में हुआ है। शनिवार सुबह सुबह करीब 02.17 बजे हादसा हुआ है। सायरंग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 20507 DN चांगजुराई इलाके में हाथियों के झुण्ड से टकरा गयी। हालाँकि लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी।

8 हाथियों की मौत
लेकिन इस हादसे में 8 हाथियों की मौत हो गयी। हर तरफ हाथियों क्षत विक्षत शव फैल गए। इतना ही नहीं टक्कर के बाद ट्रेन का इंजन और पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। जिसके बाद यात्रियों में चीख पुकार मच गई थी। गनीमत रही इस घटना यात्रियों को किसी तरह चोट नहीं पहुंचा। लेकिन यात्रियों में डर का माहौल बना हुआ है।

भारत में ट्रेन हादसे में हाथियों की मौत की कई घटनाएं हुईं
भारत में हाथियों की अप्राकृतिक मौतों का सबसे बड़ा कारण ट्रेन की टक्कर है और ट्रेन की टक्कर से मरने वाले हाथियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में हाथियों के आने-जाने के 150 के करीब गलियारे हैं। कई गलियारों से भारतीय रेलवे की लाइनें गुजरती हैं, जिसके चलते कई बार रेलवे ट्रैक पर हाथियों के आ जाने के चलते हाथियों की मौत की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इन घटनाओं को रोकने के लिए सरकार द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटेड अकूस्टिक सेंसर लगाने की तैयारी है। साथ ही एआई से लैस इंट्रुजन डिटेक्शन सिस्टम भी इंस्टॉल किया जा रहा है, लेकिन इस पूरे काम में अभी समय लग सकता है।

साथ ही हाथियों को ट्रेन हादसों से बचाने के लिए पहचानी गई जगहों पर हाथियों की आवाजाही के लिए अंडरपास और रैंप का निर्माण करने की योजना है। साथ ही ट्रैक के किनारे बाड़ लगाने, सभी पहचाने गए हाथी कॉरिडोर पर लोको पायलटों को पहले से चेतावनी देने के लिए साइनबोर्ड लगाने, रेलवे की जमीन के अंदर ट्रैक के आसपास की वनस्पति और खाने की चीजों को हटाना और जंगल वाले इलाके में सोलर सिस्टम के साथ LED लाइट लगाने जैसे काम किए जा रहे हैं।

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