डॉक्टरों की साजिश से मौत का ब्लूप्रिंट: गुजरात से फरीदाबाद तक फैला आतंकियों का नेटवर्क
रसायनिक और विस्फोटक हमला नाकाम

नई दिल्ली, 10 नवंबर 2025। सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई से देश एक बड़ी आतंकी साजिश से बाल-बाल बच गया। गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हुई समन्वित कार्रवाई में खतरनाक रासायनिक और विस्फोटक हमले की योजनाओं का भंडाफोड़ हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में अधिकांश मेडिकल की पढ़ाई कर चुके डॉक्टर हैं, जो देश में तबाही मचाने की साजिश रच रहे थे।
गुजरात में रसायनिक हमला विफल: “राइसिन जहर” बनाने की कोशिश
गुजरात एटीएस ने रविवार को अहमदाबाद में तीन आतंकियों को गिरफ्तार कर देश में रसायनिक हमला करने की साजिश को नाकाम किया। आरोपियों में एक डॉ. अहमद मोहियुद्दीन सैयद (35) शामिल है, जिसने चीन से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। अन्य दो आरोपी हैं:
आजाद सुलेमान शेख (20), निवासी शामली (उत्तर प्रदेश)
सुहैल मोहम्मद सलीम खान (23), निवासी लखीमपुर (उत्तर प्रदेश)

एटीएस ने इनके पास से तीन पिस्टल, 30 जिंदा कारतूस, और चार लीटर अरंडी का तेल बरामद किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि डॉक्टर अहमद अफगानिस्तान के “अबु खदीजा” से संपर्क में था, जो इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (ISKP) से जुड़ा हुआ है।
आरोपियों ने दिल्ली, लखनऊ और अहमदाबाद में हमले की रेकी की थी। उनका उद्देश्य “राइसिन” नामक अत्यंत घातक रसायनिक जहर तैयार कर इसका प्रयोग बड़े पैमाने पर करने का था।
राइसिन इतना खतरनाक जहर है कि यह साइनाइड से भी हजारों गुना अधिक घातक माना जाता है। यह अरंडी के बीजों से निकले अपशिष्ट से बनता है और इसका कोई एंटीडोट नहीं होता।
फरीदाबाद से 350 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद
हरियाणा के फरीदाबाद में जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। डॉ. मुजम्मिल शकील के धौज स्थित किराए के घर से लगभग 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट (पुलिस ने स्पष्ट किया—RDX नहीं), दो ऑटोमैटिक पिस्टल, एक असॉल्ट राइफल (AK-47 जैसी मगर थोड़ी छोटी), 84 कारतूस और 5 लीटर रासायनिक पदार्थ बरामद किए गए।
यह कार्रवाई अनंतनाग के डॉक्टर आदिल अहमद की गिरफ्तारी के बाद हुई, जिसने पूछताछ में अपने सहयोगी डॉ. मुजम्मिल शकील का नाम उजागर किया। बताया जा रहा है कि दोनों जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नेटवर्क के हिस्से हैं और फरीदाबाद में विस्फोटक सामग्री छिपाकर रखी गई थी।
पुलिस के अनुसार, मुजम्मिल ने यह कमरा तीन महीने पहले किराए पर लिया था और मकान मालिक से कहा था कि वह केवल “सामान रखने” के लिए इसका इस्तेमाल करेगा।
बड़े नेटवर्क की जांच: चार राज्यों में फैला आतंकियों का जाल
इन दोनों मामलों की जांच अब जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और गुजरात की एजेंसियाँ मिलकर कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार डॉक्टरों और संदिग्धों का नेटवर्क हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैंडलर्स से जुड़ा हुआ हो सकता है।
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, हाफिज सईद बांग्लादेश के रास्ते भारत में हमले की साजिश रच रहा है। हाल ही में लश्कर के आतंकी सैफुल्लाह सैफ ने एक रैली में यह दावा किया था कि भारत में बड़े हमले की तैयारी की जा रही है और पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) इसका ठिकाना बनेगा।
सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से टला बड़ा खतरा
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला देश के भीतर आतंकी नेटवर्क के नए पैटर्न की ओर इशारा करता है, जहाँ उच्च शिक्षित लोग, विशेषकर मेडिकल बैकग्राउंड वाले, आतंकी संगठनों के “टेक्नो-टेररिज़्म” में शामिल हो रहे हैं। फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, और एजेंसियाँ यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इनके तार किन अंतरराष्ट्रीय संगठनों से जुड़े हैं।



