छत्तीसगढ़

सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी ने लगाई फांसी, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

रायपुर, 5 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान सुनील महानद के रूप में हुई है, जो पॉक्सो एक्ट के तहत न्यायिक हिरासत में था। घटना के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बैरक नंबर 5 में बनाया फंदा
सूत्रों के अनुसार, सेंट्रल जेल की बड़ी गोल बैरक नंबर 5 में सुनील महानद ने रविवार शाम करीब 6 बजे फांसी लगाई। जब तक जेल कर्मचारियों को घटना की जानकारी मिली और वे मौके पर पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

परिजनों ने लगाए प्रताड़ना के गंभीर आरोप
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि सुनील को जेल के भीतर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका आरोप है कि इसी दबाव और प्रताड़ना के चलते उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।

देर से सूचना देने का आरोप
परिवार का यह भी कहना है कि घटना की जानकारी उन्हें कई घंटे बाद दी गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन ने जानबूझकर देर रात तक उन्हें इस घटना से अनजान रखा।

शव को बिना सूचना मर्चुरी भेजने का दावा
परिजनों ने आरोप लगाया कि मृतक के शव को बिना उनकी जानकारी के चुपचाप मर्चुरी भेज दिया गया। उनका कहना है कि यह जेल नियमों और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। इस पूरे मामले में जेल प्रबंधन पर लापरवाही और सच्चाई छिपाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सेंट्रल जेल की निगरानी प्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कड़ी सुरक्षा के दावों के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि बैरक के भीतर फांसी का फंदा कैसे तैयार किया गया।

पुलिस जांच शुरू
मामला गंज थाना क्षेत्र का है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जेल रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक जांच की संभावना
घटना के बाद जेल प्रशासन की भूमिका को लेकर उच्चस्तरीय प्रशासनिक जांच की संभावना जताई जा रही है। यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला जेल व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़ा एक बड़ा सवाल बन सकता है।

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